हैदराबाद. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को सत्यम घोटाले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज लिमिटेड के संस्थापक एवं पूर्व अध्यक्ष बी. रामालिंगा राजू को सात साल कैद की सजा सुना दी. इससे पहले अदालत ने उन्हें और उनके दो भाइयों सहित 10 लोगों को दोषी करार दिया था.

सीबीआई के एक अधिवक्ता ने बताया कि रामालिंगा और उसके भाई बी. रामा राजू को विश्वासघात करने और धोखाधड़ी का दोषी पाया गया है. अदालत ने घोटाले के आरोपी आठ अन्य लोगों को आपराधिक साजिश रचने का दोषी करार दिया है. सत्यम घोटला सात जनवरी, 2009 को प्रकाश में आया था, जब रामालिंगा राजू ने स्वीकार किया था कि कंपनी कई सालों से अपना मुनाफा कई करोड़ रुपए बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रही थी.

कुछ शेयरधारकों की शिकायत पर दो साल बाद पुलिस ने रामालिंगा को हिरासत में लिया था. सीबीआई ने फरवरी, 2009 में इसकी जांच शुरू की थी. अपनी जांच में इसने बताया था कि इस घोटाले में शेयरधारकों को 14,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था. सीबीआई ने रामालिंगा पर सत्यम से अपने परिवार की हिस्सेदारी बेचकर 2,5000 करोड़ रुपए का लाभ कमाने का भी आरोप लगाया था.

रामालिंगा पर कई झूठी कंपनियां बनाकर इनके नाम जमीन खरीदने का भी आरोप था. आंध्र प्रदेश पुलिस ने उन्हें नौ जनवरी, 2009 को गिरफ्तार किया था.
घोटाले के बाद एक सरकारी नीलामी में सत्यम कंप्यूटर्स को टेक महिंद्रा ने खरीद लिया था. महिंद्रा सत्यम बाद में टेक महिंद्रा में विलय हो गई थी.