नई दिल्ली. भारतीय सेना की ओर से म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादी शिविरों को नष्ट करने वाले अभियान पर सवालिया निशान लगता दिख रहा है. इस ऑपरेशन को अंजाम देने वालों की वीरता से जुड़े उल्लेखों में दी गई जानकारी को सही माना जाए, तो यह अभियान म्यामांर में नहीं चला था. सेना के इन बहादुरों के वीरता पुरस्कार के उल्लेखों में पड़ोसी देश का कोई जिक्र नहीं है. 
 
खबर के अनुसार स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार ने इस अभियान में शामिल 8 सैन्य कर्मियों को वीरता पुरस्कार दिए थे, पर इन पुरस्कारों से जुड़े उल्लेखों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी. हालांकि इससे पहले विदेशी भूमि पर दिखाई गई बहादुरी के लिए भी वीरता पुरस्कारों से जुड़े उल्लेखों को सार्वजनिक किया जाता रहा है. वीरता की प्रशंसा से जुड़े उल्लेखों में इस अभियान की जानकारी तो दी गई है पर यह नहीं बताया गया है कि इसे म्यामांर में चलाया गया था.
 
इस बारे में सेना के प्रवक्ता ने कहा, 9 जून को सेना की ओर से जारी बयान को देखें. बयान में कहा गया है-सेना ने नगालैंड और मणिपुर की सीमा के नजदीक भारत-म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों के दो गुटों पर हमला किया था. भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर कभी नहीं कहा कि उसके सैनिकों ने सीमा पार हमला किया था. अभियान के दिन जारी बयान में कहा गया था कि यह अभियान ‘भारत-म्यांमार सीमा पर हुआ है और सेना म्यांमार के प्रशासन के साथ संपर्क में है.
 
गौरतलब है कि सूचना-प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि भारतीय सेना ने म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों के दो शिविरों पर हमला किया है. राठौर के इस बयान से म्यांमार सरकार नाराज हो गई थी और उसने केंद्र सरकार से बातकर अपनी आपत्ति जताई थी.