इलाहाबाद: आरुषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से बरी किए गए तलवार दंपति की रिहाई शुक्रवार को नहीं हो सकी. दरअसल, इस रिहाई के लिए कुछ जरूरी स्टेप्स हैं जो पूरे करने होंगे. उसके बाद ही डॉक्टर राजेश और नूपुर तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल से रिहाई हो सकेगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी शुक्रवार को तलवार दंपति के वकील को मिल गई लेकिन इस कॉपी को गाजियाबाद के रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा. रिमांड मजिस्ट्रेट आदेश जारी करेंगे जिसे डासना जेल ले जाना होगा. उस आदेश के आधार पर ही राजेश और नूपुर तलवार की जेल से रिहाई होगी. शनिवार और रविवार को कोर्ट बंद रहेगा लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि रिमांड मजिस्ट्रेट शनिवार को भी बैठते हैं. अगर ऐसा हुआ तो तलवार दंपति की रिहाई कल भी हो सकती है, नहीं तो उन्हें सोमवार तक इंतजार करना होगा.
 
डॉक्टर राजेश और नूपुर तलवार को उम्मीद थी कि शायद आज उनकी रिहाई हो जाए. जेल अधिकारियों के मुताबिक दोनों बेहद खुश थे. डॉक्टर राजेश तलवार जो एक डेंटिस्ट हैं वो आम तौर पर सुबह 10 बजे से दांत की शिकायत वाले कैदियों को देखते थे लेकिन आज उन्होंने सुबह 8 बजे से ही मरीजों को देखना शुरु कर दिया. अमूमन वो हर रोज 20 मरीज देखते थे लेकिन आज पचास से साठ मरीजे देखे. वहीं, नूपुर तलवार आज महिला कैदियों से मिलीं. वो महिला कैदियों के बच्चों को देखने क्रेच में भी गईं. कल कोर्ट का फैसला आने के बाद तलवार दंपति को आधे घंटे के लिए मिलने दिया गया था. शनिवार को भी दोनों आधे घंटे के लिए मिल सकेंगे.
 
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि तलवार के माता-पिता को संदेह का लाभ दिया और दोनों को मिली उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है. बता दें कि गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट ने आरुषि की हत्या में उसके माता-पिता को दोषी मानते हुए उम्रकैद सुनाई थी. दोनों डासना जेल में बंद हैं. सीबीआई कोर्ट के फैसले को तलवार दंपति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. शुक्रवार को हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि माता-पिता ने आरुषि को नहीं मारा.
 
गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, तब से दोनों जेल में हैं. बरी होने के बाद सोमवार तक दोनों जेल से रिहा हो सकते हैं. बता दें कि मई 2008 में नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में आरुषि की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी. घर के नौकर हेमराज का भी कत्ल कर दिया गया था. बता दें कि 16 मई 2008 को नोएडा के जलवायू विहार के एल-32 फ्लैट में आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या हुई थी. आरुषि तलवार की गला काटकर हत्या की गई थी. 
 

शुरूआती जांच में शक की सुई नौकर हेमराज पर गई लेकिन नोएडा पुलिस ने जब घर की जांच की तो नौकर हेमराज का शव घर की छत पर मिला. बाद में जांच के दौरान शक की सुई आरुषि के माता-पिता पर गई और जब सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई तो पूरा देश ये सोचकर ही दंग रह गया कि माता-पिता अपनी इकलौती बेटी का इस बेरहमी से कत्ल कैसे कर सकते हैं ?
 

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