इलाहाबाद: 2008 में हुए आरुषि तलवार हत्याकांड मामले में कल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया है. डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार 2013 से गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे थे. आज आरुषि के माता-पिता को रिहा किया जाएगा लेकिन डासना जेल के सुप्रिडेंडेट दधिराम ने बताया कि अभी उनके पास कोर्ट ऑर्डर की कॉपी नहीं पहुंची है. उन्होंने कहा कि ऑर्डर की कॉपी मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि 2013 में ट्रायल कोर्ट ने राजेश और नुपुर तलवार को उम्रकैद की सजा दी थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि परिस्थितियों और सबूतों के अभाव में दंपत्ति को दोषी करार नहीं दिया जा सकता है.
 
तलवार दंपत्ति के वकील ए मीर ने कहा है कि मझे लगता है तलवार दंपत्ति को शाम चार बजे तक रिहाई मिल जाएगी. सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ तलवार दंपति ने जनवरी 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. गुरुवार को हाईकोर्ट के जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र की बेंच ने केस की जांच में खामी का हवाला देते हुए दोनों को बरी कर दिया. साथ ही तलवार दंपति को रिहा करने के आदेश दिए. कोर्ट ने अपने फैसले में सबूतों के अभाव की बात कही. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तलवार दंपति को सिर्फ संदेह के आधार पर सजा दी गई थी, जो सही नहीं है. 
 
2014 में दंपत्ति ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
 
आरुषि के माता-पिता ने जनवरी 2014 में सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद गुरुवार को जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस अरविंद कुमार मिश्र की बेंच ने आरुषि हत्याकांड मामले की जांच में खामी का हवाला देते हुए दंपत्ति को बरी कर दिया. इसी के साथ तलवार दंपति को भी रिहा करने के आदेश दिए. 
 
क्या है मामला
 
16 मई 2008 को नोएडा के जलवायू विहार के एल-32 फ्लैट में आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या हुई थी. जांच के दौरान शक की सुई आरुषि के माता-पिता पर गई और जब सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई तो पूरा देश ये सोचकर ही दंग रह गया कि माता-पिता अपनी इकलौती बेटी का इस बेरहमी से कत्ल कैसे कर सकते हैं?