नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक के मामले में अब एक और नया मोड़ आ गया है. इंडिक कलेटिव ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पटाखों की बिक्री पर लगी रोक को हटाने की मांग की है. ट्रस्ट ने अपनी अर्जी में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट 9 अक्टुबर 2017 के अपने उस आदेश में बदलाव करे, जिसमें कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है.
 
याचिका में ये भी भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट 12 सितम्बर के आदेश को फिर से लागू करे, जिसमें कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सशर्त पटाखे को बेचेने का आदेश दिया था. इस मामले में बड़ी बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट अर्जी पर सुनवाई को तैयार हो गया है और कल सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा. 
 
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को पूरे दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों की बिक्री पर रोक 1 नवंबर तक रहेगी, उसके बाद व्यापारी अपने पटाखे बेच सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम देखना चाहते हैं कि दीवाली पर पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से हवा की गुणवत्ता पर कुछ असर पड़ता भी है या नहीं. 
 
इससे पहले 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और NCR में पटाखे की बिक्री पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था. पटाखा व्यपारियों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 50 लाख किलो पटाखें, दिल्ली और एनसीआर की आबादी के केवल 10 फीसदी के लिए ही जो पाएंगे ऐसे में दूसरे राज्यो से पटाखें लाने की इजाजत दी जाए. व्यपारियों ने ये भी दलील दी कि उनके गोदाम नियम के मुताबिक दिल्ली के बाहर है ऐसे में एनसीआर से पटाखें दिल्ली लाने की इजाजत दी जाए. 
 
अस्थायी पटाखा लाइसेंस होल्डर की तरफ से दलील की गई थी कि वो पिछले 40 सालों से व्यापार कर रहे है और कोर्ट के आदेश के बाद उनका धंधा चौपट हो गया है. इस किये कुछ दिनों के लिए ही सही उन्हें अस्थायी दुकान लगाने की इजाजत दी जाए. पटाखा व्यपारियों की तरफ से दलील की गई कि दीवाली के बाद बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए केवल पटाखें जिम्मेदार नही है बल्कि इसकी मुख्य वजह किसानों द्वारा पराई जलाना और दिल्ली एनसीआर में बढ़ता ट्रैफिक है.
 
 
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