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राहुल के बयान और जय शाह पर लगे आरोप की वजह से संघ की मीटिंग का एजेंडा बैकफुट पर

राहुल के बयान और जय शाह पर लगे आरोप की वजह से संघ की मीटिंग का एजेंडा बैकफुट पर

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  • Thursday, October 12, 2017 - 16:51
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RSS Agenda is on backfoot Because of Jay Amit Shah and Rahul gandhis Statement over women

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राहुल के बयान और जय शाह पर लगे आरोप की वजह से संघ की मीटिंग का एजेंडा बैकफुट परRSS Agenda is on backfoot Because of Jay Amit Shah and Rahul gandhis Statement over womenThursday, October 12, 2017 - 16:51+05:30
भोपाल. राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के कार्यकारी मंडल की मीटिंग साल में दो बार होती है, मार्च और अक्टूबर में. इस साल की तारीखें और जगह भोपाल भी महीनों से तय थीं, उम्मीद थी कि आगामी गुजरात और हिमाचल के चुनावों और पश्चिम बंगाल व केरल को लेकर कुछ बड़े फैसले लिए जाएंगे, लेकिन इस मीटिंग का पहला दिन ही राहुल गांधी के संघ में महिलाओं की एंट्री और अमित शाह के बेटे पर लगे आरोपों की भेंट चढ़ गया. कल संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्या ने राहुल के बयान पर जो प्रतिक्रिया दी, उसे भी संघ के मुताबिक मीडिया ने अलग ढंग से छापा तो रात में फिर से इस पर मंथन हुआ और सुबह होते ही फिर उस बयान पर एक क्लेरीफिकेशन जारी किया गया. इतना ही नहीं संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का अमित शाह का बेटे को लेकर दिया गया बयान भी सुबह से ही सभी चैनल्स की सुर्खियां बन गया.
 
यूं तो संघ की इस मीटिंग में कुछ और बड़े फैसले लिए जाने थे, यहां तक तक कि अगले साल मार्च में सर कार्यवाह भैयाजी जोशी का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उस बारे में भी फैसला लिया जाना है, लेकिन राहुल के शाखाओं में महिलाओं को लेकर दिए गए बयान और जय शाह के केस ने वरिष्ठ संघ नेताओं को कुछ और ही मामलों में फंसा दिया. संघ के कार्यकारी मंडल में टॉप के 350 अधिकारी-प्रचारक भाग ले रहे हैं. इसमें कोई भी नेता भाग नहीं लेता. संघ ने पूरे देश को 11 क्षेत्रों और 42 प्रांतों में अपने काम की सुविधा के हिसाब से बांट रखा है, उन सभी से जुड़े क्षेत्रीय और प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी और राष्ट्रीय टीम के अधिकारी ही हिस्सा लेंगे.
 
इस बार इस मीटिंग में कुछ बड़े बदलाव भी किए गए हैं. जहां पहले इस मीटिंग में संघ के सभी आनुशांगिक संगठनों के पदाधिकारी भाग लेते थे, लेकिन इस बार से चूंकि उनकी मीटिंग हाल ही में वृंदावन में हो चुकी है, तो केवल उन्हीं गिनती के संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिनसे ज्यादा लोग जुड़े हैं, संघ उन्हें जन संगठन मानता है. उनमें भाजपा के अलावा विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), वनवासी कल्याण परिषद, किसान संघ, विद्या भारती और बनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय पदाधिकारी ही होंगे. ये दिलचस्प है कि इस मीटिंग में स्वदेशी जागरण मंच और मजदूर संघ जैसे संगठन शामिल नहीं है. एक और बड़ा बदलाव इस मीटिंग में ये किया गया है कि अब तक मार्च और अक्टूबर दोनों मीटिंग में संघ प्रस्ताव पारित करता था, जिनमें से ज्यादातर राजनीतिक खबरों का केन्द्र बनते थे. लेकिन इस बार से केवल मार्च में ही प्रस्ताव पारित होंगे, अक्टूबर की मीटिंग में केवल पिछले 6 महीने के कार्यों की विवेचना और संघ की कार्ययोजना पर ही विचार होगा. हालांकि, ये माना जा रहा है कि गुजरात, हिमाचल जैसे चुनावी राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल और केरल हिंसा पर भी चर्चा तय है और ये भी तय होना है कि भैया जी जोशी ही सरकार्यवाह के पद पर रहेंगे या दत्तात्रेय होसबोले जैसे किसी संघ अधिकारी को उनकी जगह लाया जा सकता है. 
 
संघ में सरकार्यवाह का पद संघ प्रमुख के बाद दूसरा सबसे अहम पद माना जाता है, इसलिए पूरे देश के स्वंयसेवकों की नजर इस पर रहती है. ऐसे में जब गुजरात में राहुल का बयान आया कि आपने कभी संघ की शाखाओं में महिलाओं को शॉर्ट में देखा है? तो इसका दो तरह से काउंटर किया गया. एक तो सोशल मीडिया पर राहुल के महिलाओं के शॉर्ट पहनने वाले बयान को मुद्दा बनाया गया, कि राहुल अपनी बात ऐसे भी रख सकते थे कि क्या आपने संघ की शाखाओं में महिलाओं को देखा है. दूसरे मीटिंग से पहले की प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्या ने जवाब दिया, कि पुरूष हॉकी टीम में पुरुष ही खेलेंगे, अगर राहुल को महिलाएं देखनी हैं तो महिला हॉकी का मैच देखें. राहुल को महिलाओं की चिंता है या संघ की. हालांकि बाद में उन्होंने ये भी बताया कि राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं की शाखा लगाती है औऱ आम शाखाओं में पुरुष जाते हैं.
 
लेकिन मामला फिर भी लगता है ठंडा पड़ा नहीं, संघ के मुताबिक कुछ अखबारों ने इस तरह से कुछ खबरें छापी हैं कि संघ महिलाओं को एंट्री देने पर विचार कर रहा है. इस पर संघ ने अपने ट्विटर एकाउंट से फिर एक क्लेरीफिकेशन बयान जारी किया है कि डा. वैद्य के बयान के मुताबिक संघ शाखाओं में पुरुषों के जरिए उनके परिवार से सम्पर्क रखता है और राष्ट्रीय सेविका समिति महिलाओं के बीच विभिन्न कार्य़क्रमों और शाखाओं के जरिए काम करती है. अभी संघ के पदाधिकारी इसी मुद्दे से पूरी तरह नहीं निपट पाए थे कि दत्तात्रेय होसबोल की सुबह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह के बेटे जय शाह से सम्बंधित सवाल उठ गए, उन्होंने जवाब दिया कि प्रथम दृष्टया अगर कोई मामला बनता हो तो जांच होनी चाहिए. उसके बाद उनसे काउंटर सवाल भी हुए कि उन्हें नहीं लगता कि कोई प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता है, तो उनका जवाब था कि इसको आरोप लगाने वाले सिद्ध करें. साफ है ये सवाल उनके एजेंडे में नहीं थे. ऐसे में इस मीटिंग में संघ के अपने मुद्दे बैकफुट पर हैं और राहुल का बयान और जय शाह का मुद्दा उनपर हावी हो चला है.
 
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First Published | Thursday, October 12, 2017 - 16:30
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