इलाहाबाद: आरुषि हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को बड़ी राहत देते हुए उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया है. जस्टिस बी के नारायण और जस्टिस ए के मिश्रा की खंडपीठ ने अपने फैसले में तलवार दंपत्ति को संदेह का लाभ देते हुए आरुषि तलवार केस में बरी करने का फैसला सुनाया. कोर्ट ने अपने फैसले में जांच के दौरान सामने आई खामियों का भी जिक्र किया. 16 मई 2008 को नोएडा के जलवायू विहार के एल-32 फ्लैट में आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या हुई थी. आरुषि तलवार की गला काटकर हत्या की गई थी. शुरूआती जांच में शक की सुई नौकर हेमराज पर गई लेकिन नोएडा पुलिस ने जब घर की जांच की तो नौकर हेमराज का शव घर की छत पर मिला. बाद में जांच के दौरान शक की सुई आरुषि के माता-पिता पर गई और जब सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई तो पूरा देश ये सोचकर ही दंग रह गया कि माता-पिता अपनी इकलौती बेटी का इस बेरहमी से कत्ल कैसे कर सकते हैं?
 
आरुषि मर्डर केस से जुड़े कुछ ऐसे सवाल हैं जो अनसुलझे हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार कहां है? जांच के दौरान दीवार पर पाए गए खून से सने पंजों के निशान किसके थे? स्कॉच की बोतल पर किसके हाथ के निशान थे? फिंगर प्रिंट के साथ किसने छेड़छाड़ की? हेमराज की हत्या कर उसकी लाश छत तक कौन ले गया? हत्या की रात क्या बाहर से कोई शख्स घर के अंदर आया? सीढ़ियों पर खून के धब्बे किसके थे? आरुषि के खून से सने कपड़ों का क्या हुआ? 
 
पहले नोएडा पुलिस और फिर सीबीआई ने इस मामले की जांच की. इस मामले में नया मोड़ उस वक्त आया जब सीबीआई द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को सीबीआई कोर्ट ने चार्जशीट में बदल दिया. सीबीआई लगातार ये साबित करने की कोशिश करती रही कि आरुषि तलवार और नौकर हेमराज का कत्ल तलवार दंपत्ति ने ही किया है जबकि तलवार दंपत्ति सीबीआई के इस तर्क को लगातार गलत बताते रहे. 
 

 

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