नई दिल्लीः दिल्ली मेट्रो के बढ़े हुए किराये पर मचे घमासान के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डॉयलॉग एण्ड डेवलपमेंट कमीशन (डीडीसी) को 6 सवालों की समीक्षा करने के आदेश दिए हैं. केजरीवाल ने जल्द से जल्द इस मामले में डीडीसी को रिपोर्ट सौंपने को कहा है. समीक्षा में इस बात की जांच की जाएगी कि क्या मेट्रो किराये में बढ़ोतरी से बचा जा सकता था? 10 अक्टूबर से दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ चुका है. केंद्र और दिल्ली सरकार इस बढ़े हुए किराये पर आमने-सामने हैं. केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इस किराया बढ़ोतरी को  अन्यायपूर्ण बताया था. केजरीवाल ने 6 महीने में दो बार मेट्रो के किराये में बढ़ोतरी को जनता के साथ अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी बताते हुए इसे रोकने की मांग की थी.
 
इसी के मद्देनजर कुछ सवालों का जवाब तलाशने के लिए बुधवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डीडीसी को किराया बढ़ोतरी की समीक्षा के आदेश दिए. केजरीवाल ने कहा कि मुख्य सचिव तत्काल डीडीसी जांच के आदेश जारी करें. सीएम ने कहा, इस समीक्षा में 6 सवालों के जवाबों से यह साफ हो जाएगा कि क्या मेट्रो किराये में बढ़ोतरी से बचा जा सकता था केजरीवाल ने पूछा, मेट्रो किराये में बढ़ोतरी क्या तर्कसंगत थी? क्या मेट्रो किराये में बढ़ोतरी से बचा जा सकता था? क्या दिल्ली मेट्रो अपनी अधिकतम क्षमता के साथ काम कर रही है? क्या दिल्ली मेट्रो किराया बढ़ोतरी के बजाय अन्य स्रोतों से आय अर्जित नहीं कर सकती थी? क्या दिल्ली मेट्रो के संचालन में कोई कमी है? क्या दिल्ली सरकार के नुमाइंदे ने अपनी बात बोर्ड में सही तरीके से नहीं रखी?
 
दिल्ली सरकार के इन 6 सवालों पर डीडीसी को समीक्षा करने का आदेश दिया गया है. फिलहाल इस जांच रिपोर्ट के बाद दिल्ली सरकार अपना आगे का रूख तय करेगी. गौरतलब है कि ‘आप’ सरकार  मेट्रो किराये में बढ़ोतरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को बख्शने के मूड में नजर नहीं आ रही है. केजरीवाल ने केंद्र सरकार को मेट्रो के घाटे को 50-50 प्रतिशत बांटने का सुझाव भी दिया था.अरविंद केजरीवाल ने कोलकाता मेट्रो का उदाहरण देते हुए कहा था कि जब केंद्र सरकार कोलकाता मेट्रो की क्षति की पूरी भरपाई खुद कर रही है तो दिल्ली मेट्रो के लिए आधा भार क्यों नहीं उठा सकती.  इसके जवाब में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने केजरीवाल के इस प्रस्ताव को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया था.
 
दरअसल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ही बताया था कि मेट्रो को हर साल 3000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है. इस घाटे की भरपाई के लिए किराया बढ़ाया जाना जरूरी है. किराया बढ़ोतरी को टालने के लिए  केजरीवाल ने 3000 करोड़ के घाटे को केंद्र के साथ आधा-आधा बांटने का प्रस्ताव रखा था. जिसके बाद केंद्रीय मंत्री पुरी ने उनके इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.