नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सुधारों के एजेंडे को गुरुवार को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब देश के अब तक के सबसे बड़े टैक्स सुधार से जुड़े विधेयक को मंजूरी मिले बिना संसद का मॉनसून सत्र खत्म हो गया. हालांकि सूत्रों का कहना है कि सरकार उत्पाद एवं सेवा कर (जीएसटी) बिल को पारित की एक और कोशिश करते हुए 31 अगस्त से पांच दिनों का विशेष संसद सत्र बुला सकती है.
 
इस बारे में सवाल पूछे जाने पर वित्तमंत्री ने ना तो इसे खारिज किया और ना ही इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि वह सरकार की रणनीति उजागर नहीं करना चाहते. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी बिल) का मकसद आर्थिक विकास दर बढ़ाना है. इसका मकसद वस्तुओं पर केंद्रीय और राज्य स्तरीय अलग-अलग टैक्स दरों की जगह एक समान राष्ट्रीय सेल्स टैक्स लगाना है. जीएसटी के समर्थन में दलील देने वाले कहते हैं कि इससे आर्थिक विकास में दो फीसदी तक का योगदान हो सकता है और एक समान राष्ट्रीय बाजार होने से घरेलू व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. इस बिल के पास होने में अड़ंगा डाले जाने से सरकार के लिए इसे अगले वर्ष अप्रैल से लागू करने कठिनाई हो सकती है.
 
इस बिल को पास कराने के लिए पीएम के पास शीत सत्र से पहले पार्लियामेंट की विशेष बैठक बुलाने का विकल्प है लेकिन यह इस संदर्भ में तब तक बेमानी रहेगा, जब तक कांग्रेस इस विधेयक पर बहस और वोट करने के लिए सहमत नहीं हो जाती है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है, हमने इस पर (विशेष सत्र) अभी फैसला नहीं लिया है. संसद से पारित होने के बाद जीएसटी को देश के आधे राज्यों से मंजूरी हासिल करना जरूरी होगा. कांग्रेस का कहना है कि वह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित बीजेपी के तीन बड़े नेताओं के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद के बाहर और भीतर विरोध जारी रखेगी.
एजेंसी