नई दिल्ली. कल से जारी संसद में पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पर सीधा हमला किया है.
 
 चिदंबरम ने कहा कि अगर वह बोफोर्स मामले में राजीव पर आरोप लगाने से पहले अपने साथी मंत्री अरुण जेटली से पूछ लेतीं, तो उन्हें पूरी सच्चाई पता चल जाती, क्योंकि तब वाजपेयी सरकार में जेटली कानून मंत्री थे.
 
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा,’ बोफोर्स मामले में राजीव गांधी को 4 फरवरी 2004 को कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी थी. सीबीआई को जांच में राजीव के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला था. उन्होंने कहा कि तब तीन महीने बाद तक एनडीए की सरकार सत्ता में थी.
 
चिदंबरम ने पलटवार करते हुए  सवाल किया कि आखिर एनडीए सरकार ने तब सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला क्यों नहीं किया. उन्होंने कि तब जेटली ने ही सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया था कि राजीव के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.
 
चिदंबरम ने सुषमा द्वारा ललित की मदद करने पर कहा, ‘ललित मोदी की मानवता के आधार पर मदद करनी थी तो भारतीय दस्तावेज क्यों नहीं दिलवाए? सुषमा स्वराज और सरकार ने ललितकांड पर जवाब नहीं दिए.’
 
उन्होंने कहा, ललित मोदी पर केस दर्ज  होने के बावजूद सुषमा ने मदद की. सरकार को चिट्ठियां जारी करनी चाहिए. सही जवाब न मिलने तक कांग्रेस आगे भी सवाल पूछती रहेगी.’
 
सुषमा के संसद में लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए चिदंबरम ने कहा कि ललितकांड पर सफाई के दौरान राजीव गांधी के खिलाफ आरोप लगाना हैरान कर देने वाला था. ललितकांड पर कांग्रेस ने जूलियन असांज का हवाला देते हुए कहा कि असांज के प्रत्यर्पण में चार साल लग गए. प्रत्यर्पण एक कानूनी दांव है. इसीलिए कांग्रेस ने निर्वासन की मांग की थी.