बड़वानी: गुजरात में बने सरदार सरोवर बांध की वजह से मध्य प्रदेश के इलाकों में नर्मदा का पानी घुसने से विस्थापित लोगों के रोजगार सहित पुनर्वास और उचित मुआवजा की मांग को लेकर सोशल एक्टिविस्ट मेधा पाटकर के नेतृत्व में छोटा बरदा गांव में तीन दर्जन महिलाएं जल सत्याग्रह पर बैठ गई हैं.
 
मेधा पाटकर ने इनखबर से कहा है कि हम अपने शरीर का इस्तेमाल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग मनवाने के लिए हथियार के तौर पर कर रहे हैं जबकि सरकार पानी के बढ़ते स्तर को हथियार बनाकर हमें हटाना चाहती है. पाटकर ने कहा कि हम जल समाधि लेने को तैयार हैं लेकिन जगह खाली नहीं करेंगे.
 
मेधा पाटकर और नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता इस बात पर अड़े हैं कि जब तक उनकी पूरी मांगें स्वीकार नहीं कर ली जाती तब तक वे जलसमाधि में बैठकर अपने शरीर को हथियार बनाकर सरकार की हठधर्मिता के आगे संघर्ष जारी रखेंगे. 
 
जलभराव के इस संकट के बावजूद और सरकार की तरफ से गांव खाली करने की समय सीमा खत्म होने पर भी ग्रामीण अपने घरों में बने हुए हैं. इस मांग को लेकर कि उन्हें पूर्ण विस्थापन, उचित मुआवजा और पूर्ण अधिकार सरकार की ओर से नहीं दिए गए हैं.
 
मेधा पाटकर ने साफ तौर पर कहा कि विस्थापन की इस पूरी कार्यवाही में काफी गड़बड़ी हैं. भ्रष्टाचार और सरकार की हठधर्मिता के कारण ग्रामीण जल समाधि लेने के लिए मजबूर हैं.
 
 
पाटकर के अनुसार सरकार ने बिना सोचे-समझे केवल दिखावे के लिए आनन-फानन में सरदार सरोवर बांध के लोकार्पण की तैयारी कर ली हैं.
 
एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन यानी 17 सितंबर को इसका लोकार्पण करेंगे वही मध्य प्रदेश के धार और बड़वानी जिले के विस्थापित और नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता पूर्ण विस्थापन और मुआवजे की मांग को लेकर जल सत्याग्रह पर डटे रहेंगे.
 
 
जैसे-जैसे बांध का पानी बढ़ रहा है वैसे-वैसे डूब प्रभावित क्षेत्रों में भी पानी का स्तर बढ़ रहा है. बड़वानी जिले के छोटा बरदा गांव और धार जिला का निसरपुर चिखल्दा में पानी लगभग गांव तक पहुंच चुका है.
 
बड़वानी का राजघाट पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है. मेधा पाटकर और विस्थापित ग्रामीणों का कहना है कि उनको बिना मुआवजा दिए घर तुड़वा दिए गए हैं जबकि कोर्ट ने कहा था कि जब तक सबका विस्थापन ना हो जाए तब तक बांध ना चालू किया जाए.
 
 
जल सत्याग्रह शुक्रवा को शुरू हुआ था जिसका आज दूसरा दिन है. आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा है कि कल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण करेंगे तो उनके भाषण में नर्मदा घाटी के विस्थापित लोगों के घाव पर मरहम लगाने के लिए क्या ऐलान होता है, उसे सुनकर आगे की रणनीति तय करेंगे.
 
 
नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत जल सत्याग्रह पर बैठे लोगों की मांग है कि उनका पूर्ण विस्थापन और पूरा पुनर्वास हो जिसमें रोजगार भी शामिल है. आंदोलनकारियों ने मुआवजा में भ्रष्टाचार की शिकायत करते हुए इसकी जांच की मांग की है और प्रभावित लोगों को सही मुआवजा बिना किसी भ्रष्टाचार के देने की मांग की है.