नई दिल्ली. फ्लैट खरीदने वालों को साधारण निवेशक नहीं समझा जा सकता क्योंकि उन्होंने फ्लैट के लिए अपनी गाढ़ी कमाई लगाई है, सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर केलिप्सो कोर्ट प्रोजेक्ट में फ्लैट देने में हो रही देरी को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कही. जेपी एसोसिएट ने एनसीडीआरसी के आदेश को सुप्रीम में चुनोती दी है.
 
सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट खरीदारों की परेशानी पर चिंता जताते हुए कहा कि हम बिल्डर को मनमानी करने की इजाजत नहीं दे सकते. सुप्रीम कोर्ट ने केलिप्सो कोर्ट प्रोजेक्ट में फ्लैट देने में हो रही देरी पर जेपी एसोसिएट को 10 फ्लैट खरीदारों को पांच-पांच लाख रुपये देने का आदेश दिया है. 
 
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जेपी एसोसिएट द्वारा एनसीडीआरसी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है.
 
 
वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान जेपी एसोसिएट की तरफ से दलील दी गई कि कंपनी को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा रकम निकालने की इजाजत दी जाए कि वो आदेश के मुताबिक पैसा दे सके. लेकिन कोर्ट ने दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई झेल रही कंपनी को मुआवजा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा रकम निकालने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है.
 
दरअसल फ्लैट देने में हो रही देरी पर आयोग ने जेपी पर 12 फीसदी प्रति वर्ष के हिसाब से जुर्माना लगाया था. पिछले साल जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के आदेश के अुनपालन पर रोक लगा दी थी. यह आदेश इस शर्त पर था कि कंपनी चार करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराएगी.