नई दिल्ली: मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में दलील दी है कि उनके ख़िलाफ़ पेड न्यूज के मामले में जो भी रिकॉर्ड है उसमें कोई सबूत नहीं है. ऐसे में चुनाव आयोग के फ़ैसले को रद्द किया जाए.
 
मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने चुनाव आयोग के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनोती दी है. गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई दौरान नरोत्तम मिश्रा की ओर से दलील दी गई है कि चुनाव आयोग द्वारा गठित पेड न्यूज कमेटी ने जिसके रिपोर्ट के आधार पर मुझे दोषी ठहराते हुए तीन साल के लिए अयोग्य करार दिया गया है, उस कमेटी ने बिना मेरा पक्ष सुने फैसला सुना दिया था.  
 
 
उन्होंने कोर्ट में नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि कमेटी कोई भी फैसला सुनाने से पहले उनके पक्ष को भी सुने. नरोत्तम मिश्रा ने ये भी कहा कि उनके ख़िलाफ़ पेड न्यूज के मामले में जो भी रिकॉर्ड है उसमें कोई सबूत नहीं है. ऐसे में चुनाव आयोग के फ़ैसले को रद्द किया जाए. दिल्ली हाईकोर्ट में 13 सितम्बर को इस मामले की अगली सुनवाई होगी. 
 
दरअसल चुनाव आयोग ने पेड न्यूज का दोषी पाते हुए नरोत्तम मिश्रा को 23 जून को तीन साल के लिए अयोग्य करार दिया था. आयोग ने पाया था कि वर्ष 2008 में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में मीडिया में लेख तथा विज्ञापन वाली खबरे छपवाई गई, जो कि नियमों के विरुद्ध था. 
 
 
चुनाव आयोग के फैसले पर SC ने लगा दी है अंतरिम रोक
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. 28 जुलाई को कोर्ट ने नरोत्तम मिश्रा को अयोग्य ठहराने के चुनाव आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए हाई कोर्ट से दो हफ्ते में केस सुनकर निपटाने का आदेश दिया था.