नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने एक अनूठे फैसले में दशकों से खेतिहर भूमि का कब्जाए एक परिवार के लोगों को जमीन तो खाली करने का आदेश दिया है लेकिन उस जमीन पर बोए गए फसल में हुए निवेश और मेहनत को देखते हुए उसे काटने की इजाजत दे दी है. 
 
सुप्रीम कोर्ट ने सालों से करीब साढ़े छह बीघा जमीन पर कब्जाए परिवार के दावे को नकार दिया है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया है जिसमें इस जमीन पर उस परिवार का मालिकाना हक मानने से इनकार कर दिया था. हालांकि इस परिवार के उस आग्रह को स्वीकार कर लिया कि है उस जमीन पर फसल लहलहा रही है, जिसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है और इसके लिए उन्होंने अच्छा खासा निवेश कर रखा है, लिहाजा फसल पकने पर उन्हें ही काटने का अधिकार मिलना चाहिए. 
 
 
कोर्ट ने इस परिवार को भूमि पर लगे फसल काटने की अनुमति दे दी है, याचिकाकर्ता परिवार के सदस्यों का कहना था कि वह नवंबर तक फसल काट लिए जाएंगे. जिस पर कोर्ट ने उन्हें फसल काटने या दिसंबर महीने, इनमें से जो पहले हो, तक जमीन से अपना कब्जा हटाने के लिए कहा है. 
 
राजस्थान के बूंदी जिला निवासी मोहन और उसके तीन भाइयों ने छह बीघा और 12 बिसवा खेतिहर जमीन पर कब्जा कर रखा था, राजस्व से कुछ इंट्री उनके पक्ष में होने के कारण ये सभी उस पर मालिकाना हक जता रहे थी. साल 1980 में राजस्व अपीलीय अथॉरिटी, कोटा ने इन भाइयों के पक्ष में फैसला दिया था लेकिन बाद में राजस्व बोर्ड और हाईकोर्ट ने राजस्व अपीलीय अथॉरिटी के फैसले को दरकिनार करते हुए उस जमीन पर इन भाइयों के दावे को अस्वीकार कर दिया था, जिसकेबाद सभी भाइयों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.