श्रीनगर. बीएसएफ जवानों पर जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में जिंदा पकड़े गए आतंकी कासिम खान उर्फ नावेद ने कहा है कि वह पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद इलाके के ग़ुलाम मुहम्मदाबाद का रहने वाला है. उसके दो भाई और एक बहन हैं. इनमें से एक लेक्चरर है और एक बिजनेसमैन है. नावेद ने स्वीकार किया है कि वह आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य है. 

इसके अलावा नावेद ने पुलिस को बताया है कि उनका निशाना अमरनाथ यात्रा पर जा रहे यात्रियों का जत्था था. बताया जा रहा है कि बीएसएफ की बस के ठीक पीछे अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था आने वाला था.

नावेद ने कहा कि वह अन्य आतंकियों के साथ ट्रक में सवार होकर आया था. सारे लोग समरोली इलाके में पहुंचने पर ट्रक से उतर गए और झाड़ियों में छिप गए थे. जैसे ही बीएसएफ की बस वहां पहुंचीं उन्होंने हमला कर दिया. बताया जा रहा है कि नावेद का दस्ता पंजाब के गुरदासपुर में हमला करने वाले आतंकियों के साथ आए थे. ये सभी पुंछ के रास्ते भारत की सीमा में 12 दिन पहले आए थे.

नावेद खान को पकड़ने में जम्मू के स्थानीय निवासी विक्रमजीत और राकेश की अहम भूमिका रही. विक्रमजीत को आतंकी ने बंधक बना लिया था, वहीं राकेश रास्ते से गुजर रहे थे. विक्रम ने बताया कि नावेद उससे लगातार फरार होने के लिए रास्ता पूछ रहा था. कासिम बंधकों से हिंदी में ही बात कर रह था. जब नावेद ने देखा कि पुलिस आ रही है तो उसने गोली भी चलाई जो कि विक्रम के हाथ में लगी है. 

बीएसएफ जवानों पर जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में जिंदा पकड़े गए आतंकी नावेद खान ने कैमरे के सामने क़ुबूल किया है कि वो लश्कर का फिदायीन है. कासिम 12 दिन पहले गुरदासपुर में हमला करने वाले आतंकियों के साथ ही भारत में दाखिल हुआ था. कासिम ने यह भी क़ुबूल किया कि उसे भारत में दहशत फैलाने के लिए बाकायदा तनख्वाह भी मिलती है. जब उससे पूछा गया कि वह ये सब क्यों करता है तो उसने जवाब दिया कि उसे इसमें मज़ा आता है.