नई दिल्ली: मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि भारत ने चीन से मिल रही लगातार धमकियों के मद्देनजर चीन से लगने वाली सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है. मगर इस बात की सच्चाई कुछ और है. हालांकि, ये बात सही है कि सीमा पर सैनिकों की संख्या में इजाफा हुआ है, मगर ये इजाफा रूटीन एक्सरसाइज के तहत किया गया है, जिसमें हर साल सितंबर में अति ऊंचाई वाले इलाके में मैदानी इलाके के सैनिकों को ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. 
 
भारत की ओर से सेना बढ़ाए जाने की बात को बल इसलिए मिल रहा है क्योंकि भारत हर साल अपने मैदानी इलाकों के सैनिकों को सितंबर में पहाड़ी इलाके में भेजती  है, मगर इस बार इस सालाना रूटीन एक्सरसाइज का फैसला एक महीने पहले अगस्त में ही ले लिया गया है. बता दें कि ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मैदानी इलाके के सैनिकों को ऊंचाई वाले इलाकों की ट्रेनिंग दी जा सके. वे भी उस परिस्थिति को समझ सके जो ऊपरी इलाके में रहने वाले सैनिक देखते और समझते हैं. 
 
इस रूटीन एक्सरसाइज को भारतीय आर्मी की 33 कोर बटालियन के द्वारा संचालित किया जाता है, जो चीन से सटी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर पर ट्रेनिंग कंडक्ट किया जाता है. 
 
 
बता दें कि इस रूटीन एक्सरसाइज को इसलिए युद्ध के लिहाज से देखा जा रहा है क्योंकि भारत ने अपने सालाना कार्यक्रम को एक महीने पहले कर दिया है और चीन के साथ डोकलाम मामले पर विवाद काफी गरमाया हुआ है. चीन डोकलाम से भारत को अपने सेना वापस लेने की कई बार चेतावनी भी दे चुका है. 
 
वहां पहले से ही भारत के 350 से ज्यादा सैनिक मौजूद हैं. सेना की सुकना बेस 33 कॉर्प के अलावा अरुणाचल और असम में स्थित 3 और 4 कॉर्प बेस को संवेदनशील भारत-चीन सीमा की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है. मगर ये बात स्पष्ट है कि भारत की ओर से चीन के साथ विवाद के मद्देनजर कोई सेना नहीं बढ़ाई गई है. 
 
 
बता दें कि इससे पहले आज ही चीन और भारत के अधिकारियों के बीच नाथूला में बड़े लेवल की बैठक हुई है. इसके अलावा हाल ही के दिनों में भारत और चीन की तरफ से किसी तरह की मूवमेंट देखने को नहीं मिली है.