मुंबई. चिक्की घोटाले में फंसी महाराष्ट्र की मिनिस्टर पंकजा मुंडे एक नए घोटाले में फंसती नज़र आ रहीं हैं. RTI एक्टिविस्ट विजय कुम्भर की एक RTI के जवाब में खुलासा हुआ है कि पंकज के मंत्रालय ने बिना ई-टेंडरिंग के पांच करोड़ रुपए के बिस्किट के कॉन्ट्रैक्ट दे दिया. यह कॉन्ट्रैक्ट पुणे की गोवर्धन आयुरफर्मा नाम की उस कंपनी को दिया गया जिसका लाइसेंस बहुत पहले एक्सपायर हो गया था. कॉन्ट्रैक्ट देते वक्त तक कंपनी ने लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया था.

क्या है कहानी
दरअसल 12 फरवरी 2015 को पंकजा के मंत्रालय ने करीब 95.51 लाख की आयुर्वेदिक बिस्किट खरीदने के आदेश जारी किए थे. इसके अगले ही दिन बिना किसी एक्सप्लेनेशन और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाए मंत्रालय ने इस आर्डर को 5 करोड़ कर दिया. इसका ठेका बिना ऑनलाइन बिडिंग के गोवर्धन आयुरफार्म को दे दिया गया. इस कंपनी का लाइसेंस पहले ही कतम हो चुका है और FSSAI ने इसके प्रोडक्ट्स पर काई बार सवाल भी उठाए हैं. 

कंपनी का माल पहले ही जब्त किया जा चुका है
आपको बता दें कि पछले हफ्ते ही बिना लाइसेंस के बिस्किट बनाने वाली इस कंपनी पर एफडीए ने छापा डालकर सारा माल जब्त कर लिया था. एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर ऋषिकांत केकरे ने कहा कि कंपनी का लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ था इसलिए विभाग ने पूरा स्टॉक जब्त कर लिया था. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. 2013 में ही गोवर्धन आयुरफार्मा कंपनी का एफडीए का लाइसेंस खत्म हो चुका था लेकिन कंपनी ने उसे रिन्यू नहीं करवाया. कंपनी का दावा है कि ठेका लेते वक्त किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की गई.

पंकजा पर फिर सवाल
RTI एक्टिविस्ट विजय कुम्भर ने अपनी इस RTI की पूरी जानकारी अपने ब्लॉग http://www.vijaykumbhar.blogspot.in/ पर भी साझा की है. कुम्भर का कहना है कि चिक्की घोटाले के बाद यह उसी मंत्रालय से हुआ दूसरा बड़ा घोटाला है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि सीएम देवेन्द्र फड़नवीस ने चिक्की घोटाले की जांच के लिए जो तीन सदस्यीय समिति बनायी है वह इस मामले पर भी ध्यान देगी.