नई दिल्ली. 1993 में मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन की पत्नी राहीन मेमन ने सरकार से गुहार लगाई है कि याकूब पर रहम किया जाए. राहीन ने इंडिया न्यूज से बाते करते हुए कहा कि जो हो रहा है वह गलत है. उन्होंने सरेंडर किया है और इसका मतलब है कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है.

राहीन ने भारत सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा, ‘उनकी तबियत ठीक नहीं है. जितना भुगतना था वो भुगत चुके. हमें अब भी भारत की न्यायपालिका से उम्मीदें हैं. हम फांसी माफ करने की अपील करेंगे.’ बता दें कि 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने याकूब की क्युरेटिव पीटीशन को ख़ारिज कर दिया है. अब याकूब को 30 जुलाई को फांसी होना लगभग तय माना जा रहा है. इससे पहले 9 अप्रैल को पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी बरकरार रखी थी. मेमन ने फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदलने की मांग की थी. याकूब के वकीलों की दलील थी कि वो सिर्फ धमाकों की साजिश में शामिल था, न कि धमाकों को अंजाम देने में.

याकूब की याचिका खारिज होने के साथ ही उसे कभी भी फांसी देने का रास्ता साफ हो गया है क्योंकि पिछले साल राष्ट्रपति उसकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं. इस मामले में 123 अभियुक्त हैं, जिनमें से 12 को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी जबकि 20 लोगों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई. हालांकि उनमें से दो की मौत हो चुकी थी और उनके वारिस मुकदमा लड़ते रहे. इनके अलावा 68 लोगों को उम्र कैद से कम की सज़ा सुनाई गई. जबकि 23 लोगों को निर्दोष मानकर बाइज्जत बरी कर दिया गया .