नई दिल्ली:  भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा कि यह बिलकुल इस तरह है जैसे क्रिकेट में 11 खिलाड़ियों की जगह 7 खिलाड़ियों की टीम के साथ खेला जाए. एक अंग्रेजी अखबार को दिये इंटरव्यू में एयर चीफ धनोआ ने कहा है कि वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी है. 
 
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना आतंकी हमले होने की स्थिति में पाकिस्तान से हर तरह से लोहा लेने को तैयार है. वायुसेना का इस्तेमाल खतरनाक आतंकी गतिविधियों के खिलाफ किया जा सकता है. मगर इस विकल्प पर सरकार को भी सोचना चाहिए. 
 
 
अखबार को दिए इंटरव्यू में धनोआ ने कहा, भारतीय वायुसेना के पास हर तरह की क्षमता है. हम माओवादियों के खिलाफ एक्शन ले सकते हैं लेकिन ये सब तब होगा जब सरकार से हरी झंडी मिलेगी. 
 
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर भारतीय वायुसेना को चीन और पाकिस्तान के दोनों मोर्चों पर लड़ना है और अपना दबदबा कायम रखना है तो भारतीय वायुसेना में कम से कम 42 लड़ाकू विमानों का बेड़ा होना चाहिए.
 
नक्सलियों के खिलाफ हवाई हमले करने के सवाल पर धनोवा ने कहा, थल सेना को जमीन पर इंटेलिजेंस और सर्विलांस मुहैया कराने में वायुसेना को रोल सीमित है. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आतंकी हमले को छोड़ दिया जाए, तो वायुसेना अपने क्षेत्र में हवाई हमले नहीं करेगी.  
 
 
बता दें कि अभी वायुसेना के पास महज 32 जंगी जहाज ही हैं और यह दो मोर्चों चीन और पाकिस्तान पर चुनौती का सामना कर रही है. हालांकि, फ्रांस से राफेल जल्द ही भारतीय वायुसेना को मिलने वाले हैं. बता दें कि एक बेड़े में 16-18 फाइटर प्लेन होते हैं.