लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व खनन मंत्री और रेप के आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति की जमानत के मुद्दे पर विवाद शुरू हो गया. इस मामले में कई चौंका देने वाली बातें सामने आई हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि साजिश के तहत प्रजापति को जमानत मिली है. इस मामले में एक वरिष्ठ जज भी शामिल थे.
 
रिपोर्ट्स के अनुसार, गायत्री प्रजापति को जमानत के लिए 10 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ था. रिटायर होने से तीन सप्ताह पूर्व सेशन जज ओ.पी मिश्रा को प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस के जज के रूप में तैनात किया गया था. 25 अप्रैल को उन्होंने ही प्रजापति को जमानत दी थी.
 
 
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि ओ.पी मिश्रा की तैनाती में नियमोंकी अनदेखी की गई है. 10 करोड़ रुपए में से 5 करोड़ रुपए तीन वकीलों को दिए गए जो इस पूरे मामले में बिचौलिए की भूमिका अदा कर रहे थे, बाकी के 5 करोड़ पोक्सो जज (ओपी मिश्रा) और उनकी पोस्टिंग संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत में करने वाले जिला जज राजेंद्र सिंह को दिए गए थे.
 
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद यूपी पुलिस ने गायत्री प्रजापति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी जिसके बाद 15 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. गायत्री प्रजापति के अलावा उनके सहयोगियों अशोक तिवारी, पिंटू सिंह, विकास शर्मा, चंद्रपाल, रूपेश और आशीष शुक्ला के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 376डी, 511, 504, 506 और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था.