रेवाडी: महिलाओं को सरपंच और पंचायत सदस्य बना देने भर से महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल सकता. इसके लिए समाज के पुरुषवादी सोच को बदलना भी जरूरी है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वैसी ही खबरें सामने आती रहेंगी जैसी आज हरियाणा के रेवाड़ी से आई है.
 
हरियाणा के रेवाडी में दो विधवाओं की पिटाई का मामला सामने आया है. पिटाई करने वाला कोई और नहीं इलाके की महिला सरंपच का पति और देवर है. इन लोगों के सिर पर सरपंची का नशा कुछ ऐसा सवार था कि इन्होंने न तो बुजुर्ग महिलाओं की उम्र का लिहाज कियाऔर ना ही इनके विधवा होने का ख्याल किया.
 
ये दोनों इन महिलाओं पर कभी लात-घूंसे चला रहे थे तो कभी ईंट से वार कर रहे थे. इतने से भी जी नही भरा तो बाल पकड़कर बुजुर्ग को जमीन पर पटक दिया. दरअसल, बुढाना गांव में पंचायत फंड से नाला बनाया जाना था. इन बुजुर्ग महिलाओं का कहना था कि नाला ऊंचा होगा तो पानी उनके घर में चला जाएगा. उन्होंने विरोध किया जो महिला सरपंच के पति ने इसे अपने शान गुस्ताखी मान लिया और फिर विधवा महिलाओं के साथ मारपीट की.
 
क्या है पूरा मामला ? 
बुजुर्ग विधवा महिलाओं से मारपीट की ये घटना 15 मई की है. पीड़ित महिलाओं ने जब इसकी शिकायत पुलिस में की तो आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की. बाद में मारपीट का ये वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया. कई लोगों ने ट्वीटर पर ये वीडियो हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को टैग कर दिया. जिसके बाद पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने सरपंच समेत 4 लोगों के खिलाफ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया है.
 
अंदर की बात
अंदर की बात ये है कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण तो मिल गया है, लेकिन सत्ता की चाबी आज भी पंच-सरपंच चुनी गई महिलाओं के पति, बेटे या परिवार के पुरुषों के हाथों में ही है, जो जनता के वोट से मिली कुर्सी को अपनी जागीर समझते हैं.
 
रेवाड़ी की घटना भी सत्ता की खुमारी की मिसाल है. ऐसी घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं, इसलिए सरकार को अब सोचना होगा कि क्या महिला सरपंच-पतियों और सरपंच-बेटों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई काफी है या फिर ऐसे मामलों में जिन महिलाओं के घर वाले उनके पदों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, उन महिलाओं का पद भी छीन लिया जाए क्योंकि सत्ता का नशा तभी सिर पर सवार नहीं होगा, जब कुर्सी जाने का डर होगा.