नई दिल्ली : कोयला घोटाला मामले में शुक्रवार को दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता को आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में दोषी करार दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने कोयला मंत्रालय के तत्कालीन जॉइंट सेक्रेटरी केएस क्रोफा और तत्कालीन डायरेक्टर केसी समारिया को भी दोषी करार दिया है.
 
स्पेशल सीबीआई जज भारत पराशर ने इन सभी को मध्य प्रदेश के रूद्रपुर में कोयला ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का दोषी पाया है. अब कोर्ट 22 मई को बताएगा कि इस मामले में सभी दोषियों को क्या सजा दी जाएगी.
 
कोर्ट ने इस मामले में चार्टेड अकाउंटेंट अमित पर चल रहे सभी मामलों से उन्हें बरी कर दिया. बता दें कि यह घोटाला मनमोहन सिंह के समय यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ था. कोर्ट ने इस मामले में क्रोफा और समारिया के साथ ही केएसएसपीएल कंपनी और उसके एमडी पवन कुमार अहलूवालिया को भी दोषी करार दे दिया है.
 
क्या है कोयला घोटाला ?
यह घोटाला उस वक्त सामने आया था जब जब मार्च 2012 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में तत्कालीन सरकार पर कोल ब्लॉक आवंटन में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था. 1.86 लाख करोड़ के इस घोटाले में कैग ने यूपीए सरकार पर साल 2004 से 2009 के बीच कोल ब्लॉक का आवंटन गलत तरीके से करने का आरोप लगाया था.
 
रिपोर्ट में बताया गया था कि ब्लॉक का आवंटन बिना किसी नीलामी के कर दिया गया था और ऐसा करने से सरकारी खजाने को 1 लाख करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान हुआ था और कंपनियों ने बहुत ज्यादा मुनाफा कमाया था. इन कंपनियों में टाटा स्टील, एनटीपीसी, जेएसपीएल, भूषण स्टील, और सीईएससी के नाम शामिल हैं. बता दें कि इस रिपोर्ट के आने के बाद भारत में पहली बार किसी प्रधानमंत्री पर किसी मामले को लेकर सवाल खड़े किए गए थे.