नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के लोगों को भी साधु-संतों का विरोध इस कदर झेलना पड़ सकता है कि उन्हें अपने सम्मेलन को शहर से बाहर ले जाना पड़ा, ये सबके लिए हैरत की बात हो सकती है. लेकिन ऐसा वाकई में हुआ है, ये घटना बीजेपी ने ताजा ताजा जीते राज्य उत्तराखंड की है.
 
उत्तराखंड के धार्मिक शहर हरिद्रवार में संघ के एक संगठन को अपना बोरिया बिस्तर समेटकर अपना सम्मेलन कहीं और शिफ्ट करना प़ड़ा और ये सब हुआ साधु संतों के दो संगठनों के विरोध की वजह से हुआ है.
 
दरअसल ये घटना राष्ट्रीय मुस्लिम मंच से जुड़ी है, जिसे संघ अपना आधिकारिक संगठन तो नहीं मानता लेकिन उसके वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार इस संगठन के संरक्षक हैं और माना जाता है कि उदार और राष्ट्रवादी मुस्लिमों को संघ से जोड़ने के लिए इस संगठन को हाल ही के वर्षों में शुरू किया गया है.
 
इस संगठन की शाखाएं अब देश के तकरीबन हर राज्य और सभी बड़े जिलों में फैल चुकी हैं. ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दे पर ये संगठन संघ की लाइन के साथ मुसलमानों के बीच जा रहा है. इस संगठन ने पांच और छह मई को हरिद्वार शहर में एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें मुस्लिमों के बीच गंगा सफाई, ट्रिपल तलाक और राम मंदिर को लेकर सर्वानुमति बनाने की कोशिश की जानी थी. इस सम्मेलन में खुद इंद्रेश कुमार को भी भाग लेना है.
 
सारी तैयारियां पूरी भी हो चुकी थीं, सैकड़ों मुसलमानों ने सम्मेलन में भाग लेने की तस्दीक भी कर दी थी लेकिन अचानक से हरिद्वार के दो धार्मिक संगठनों ने इस सम्मेलन का विरोध करना शुरू कर दिया कि ये सम्मेलन हरिद्वार की धरती पर नहीं हो सकता. इन संगठनों के नाम हैं ब्राह्मण सभा और अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा.
 
संघ-बीजेपी से जुड़े कई स्थानीय नेताओं ने समझाने की भी कोशिश की, लेकिन वो अपनी मांग से टस से मस नहीं हुए. दरअसल इन संगठनों ने हरिद्वार म्यूनिसिपेलिटी के एक सालों पुराने नियम के हवाले से ये मांग रखी थी, इस नियम के मुताबिक हरिद्वार शहर में हिंदुओं के अलावा बाकी किसी समुदाय के धार्मिक या सामाजिक जलसे की इजाजत नहीं दी जा सकती. हालांकि मुस्लिम मंच के पास कोर्ट का विकल्प भी था, लेकिन वो लोग टकराव के मूड में नहीं थे.
 
इन दोनों संगठनों का कहना था कि जहां ये सम्मेलन होना है निष्काम सेवा ट्रस्ट, वो जगह हर की पैड़ी के काफी पास है, और अगर इसे इजाजत मिली तो वो उसका जमकर विरोध करेंगे. ऐसे में मुस्लिम मंच के आयोजकों ने टकराव के रास्ते के बजाय अपने कार्य़क्रम का वैन्यू शिफ्ट करना ही बेहतर समझा और उसे शहर से बीस किमी दूर पीरां कलियर में शिफ्ट कर दिया. इस आयोजन में मुस्लिम समाज के करीब 150 बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्य़कर्ताओं ने भाग लेने की हामी भरी है.