मुंबई : लाल बत्ती कल्चर को लेकर उठाए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कदम के बाद अधिकतर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी गाड़ियों में से लाल बत्ती हटा दी है. कहीं इस फैसले की तारीफ हो रही है तो कहीं इसकी आलोचना की जा रही है. शिवसेना ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है.
 
शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपी संपादकीय में इस फैसले पर सवाल खड़ा करते हुए शिवसेना ने कहा है कि गाड़ियों में से लाल बत्ती हटाने के फैसले से क्या वीआईपी कल्चर सच में खत्म होगा या ये सिर्फ सस्ती लोकप्रियता के लिए किया गया एक फैसला है.
 
 
शिवसेना ने नोटबंदी से इस फैसले की तुलना करते हुए कहा, ‘नोटबंदी की तरह इस निर्णय को भी साहसिक निर्णय कहना पड़ेगा. सवाल सिर्फ इतना ही है कि नोटबंदी के फैसले का देश औऱ लोगों को आखिरकार क्या फायदा हुआ, समझ नहीं आया. उसी तरह लाल बत्ती खत्म करने से वीआईपी संस्कृति सचमुच नष्ट होने वाली है क्या या सस्ती लोकप्रियता के लिए लिया गया निर्णय है? यह सवाल भी है ही.’
 
 
बता दें कि वीआईपी कल्चर खत्म करने के उद्देश्य से पीएम मोदी ने नेताओं, मंत्रियों की गाड़ी से लाल बत्ती को हटाने का आदेश दे दिया है. एक मई से पूरे देश में लाल बत्ती पर रोक लगा दी जाएगी. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद सभी केंद्रीय मंत्रियों से गाड़ियों से लाल बत्ती को हटाने का काम शुरू कर दिया है.