श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर सरकार में वरिष्ठ मंत्री और बीजेपी नेता चंद्र प्रकाश गंगा का मानना है कि घाटी में पत्थरबाजों से निपटने के लिए गोली ही एकमात्र रास्ता है. मंत्री चंद्र प्रकाश ने कहा लातों के भूत बातों से नहीं मानते. इनका इलाज जूते हैं. जो ताकतें देशविरोधी हैं. उन्हें गोली के दम पर ही रास्ते पर लाया जा सकता है.
 
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चंद्र प्रकाश ने कहा कि जो हमारी बहादूर सेना पर पत्थर फेंकता है, वो देशद्रोही हैं. वो चाहें  फिर यहां रहें या फिर पाकिस्तान से आएं, उन्हें सिर्फ गोली से जवाब दिया जाना चाहिए. अगर वहां गोली नहीं है तो उन्हें डंडों से मारना चाहिए. मेरे शब्दों को याद रखिए, क्या ऐसा करने पर वो दोबारा पत्थर फेकेंगे? गंगा ने सवाल करते हुए कहा कि आखिर वो लोग किनसे आजादी की बात कर रहे हैं? जिनको जिंदगी भर यहीं रहना है. ऐसे लोगों को हम पप्पियां थोड़ी न देंगे, गले थोड़ी न लगाएंगे.
 
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बीजेपी के मंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब राज्य कैबिनेट ने सुरक्षाबलों और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह अधिकतम कोशिश करे कि किसी की जान न जाए. कश्मीर घाटी में पिछले कुछ सप्ताह से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं. श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के लिए नौ अप्रैल को हुए मतदान के दिन भी हिंसा हुई जिसमें आठ लोग मारे गए.
 
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इसके साथ ही कश्मीर में इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गई है और ये सेवा अगले आदेश तक बंद ही रहेगी. एनआईए ने खुलासा किया है कि कश्मीर में हिंसा को भड़काने के लिए पाकिस्तान पत्थरबाजों को कैशलेस फंडिंग कर रहा है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने पत्थरबाजों की फंडिंग के लिए फंड मैनेजर तैनात किए हैं. वह पत्थरबाजों को पैसा देते हैं जब वह भारतीय सेना पर पत्थर फेंकते हैं, इस आड़ छिपे आतंकी वहां से निकल जाते हैं.
 
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पाकिस्तान इन पत्थरबाजों को पैसा देने के लिए उसी वस्तु विनिमय प्रणाली का सहारा ले रहा है, जिसके जरिए लोग पहले व्यापार करते थे. साल 2008 से PoK से बार्टर सिस्टम के तहत 21 सामानों का कारोबार होता है. ऐसा दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और वहां रहने वाले नागरिकों को सुविधा मुहैया कराने के मकसद से किया गया था. लेकिन पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं ने अब इसका इस्तेमाल कश्मीर घाटी में तनाव फैलाने के लिए शुरू कर दिया है.
 
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पाकिस्तान धर्मार्थ संगठनों के जरिए लाखों रुपये का चंदा उगाही करते हैं, फिर उसे अपने लोगों के जरिए कश्मीर भेज दिया जाता है. कश्मीर में आकर ये पैसा पत्थरबाजों को दे दिया जाता है. प्रशिक्षित आतंकी भी पुलिस और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाले प्रदर्शनों में शामिल होते हैं. जो पत्थरबाजों की आड़ में निकल जाते हैं. आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा ‘फलह ए इंसानियत’ धर्मार्थ संगठन और जैश-ए-मोहम्मद ‘अल रहमत ट्रस्ट’ चलाते हैं. 
 
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एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 करोड़ रुपए हर साल हवाला के जरिए पाकिस्तान से कश्मीर भेजे जाते हैं. ये सीधे तौर पर फंड अलगाववादियों को मिलता है, तब वे इसे युवाओं को सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए बांटते हैं. इसके अलावा अलगाववादी पत्थरबाजी के लिए भी युवाओं को रुपए दे देते हैं.