नई दिल्ली : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग और उसके संस्थापक श्री श्री रविशंकर को गुरुवार के दिन जोरदार फटकार लगाई है. एनजीटी ने कहा है कि श्री श्री ने ट्रिब्यूनल की एक्सपर्ट कमिटी पर पूर्वाग्रह के जो भी आरोप लगाए हैं वह बेहद ही चौंकाने वाले हैं.
 
एनजीटी ने कहा कि यमुना किनारे हुए कार्यक्रम वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल की वजह से हुए नुकसान पर एक्सपर्ट कमिटी की जो रिपोर्ट आई है उसे लेकर श्री श्री ने जो भी कहा है वह काफी गैरजिम्मेदाराना है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि उन्हें अपनी जिम्मेदारी का जरा भी अहसास नहीं है.
 
एनजीटी ने कहा, ‘आपको जिम्मेदारी का जरा भी अहसास नहीं है. क्या आपको लगता है कि आपके मन में जो भी है वह बोलने की आपको पूरी छूट है?’ इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी. साथ ही एनजीटी ने इस मामले में याचिकाकर्ता से रविशंकर के बयान की विस्तृत जानकारी मांगी है ताकि कोर्ट इसका रिकॉर्ड रख सके.
 
 
इस महीने की शुरुआत में एनजीटी ने कहा था कि श्री श्री रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल की वजह से यमुना का फ्लडप्लेंस को काफी नुकसान हुआ है और इसकी भरपाई के लिए 13.29 करोड़ रुपए का खर्च आएगा. 
 
आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने एनजीटी के बयान को ‘साजिश’ कहा. आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने कहा कि उनकी लीगल टीम इस रिपोर्ट की जांच करेगी तभी इस मुद्दे पर कोई फैसला किया जाएगा.