नई दिल्लीः प्रस्तावित फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इन्श्योरेंश बिल (FRDI) के नए संशोधित ड्राफ्ट के खिलाफ ऑनलाइन याचिका पर 24 घंटों में 40 हजार हस्ताक्षर हो चुके हैं. ऑनलाइन याचिका में मांग की गई है कि इस विधेयक में बेल-इन प्रावधान न हो. मुंबई की शिल्पा श्री ने अपने हस्ताक्षर के साथ एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया है. उन्हें आशंका है कि बैंकों में जमा उनकी पूंजी को संकट के समय उसे उबारने के आंतरिक उपाय (बेल-इन) में लगा दिया जाए. याचिका में कहा गया है कि इसके तहत दिवालिया होने की स्थिति में आए किसी भी बैंक को बचाने के लिए सरकारी व्यक्ति को जमाकर्ताओं का धन लगाने का अधिकार होगा और साथ ही वह यह भी कह सकता है कि बैंक की जमाकर्ता के प्रति कोई देनदारी नहीं होगी.

बता दें कि बेल-इन यानी वित्तीय संस्थानों को उबारने के के आंतरिक साधनों संबंधी प्रावधान को लेकर मीडिया में कुछ आशंकाएं प्रकट की गई थीं। जिस पर गुरुवार को वित्त मंत्रालय की ओर से जारी हुए बयान में कहा गया कि इस विधेयक से जमाकर्ताओं की पूंजी और भी सुरक्षित हो जाएगी. मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा उपायों में कोई बदलाव नहीं होगा, बल्कि इस विधेयक में उनके हितों के पारदर्शितापूर्ण तरीके से संरक्षण के कुछ और भी प्रावधान किए गए हैं.

इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी एससी गर्ग ने भी कहा कि FRDI बिल में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है, बैंकों में जमा रकम सुरक्षित रहेगी. उन्होंने कहा कि पीएसयू बैंकों में जमा लोगों की पूंजी की गारंटी सरकार देती है, इसलिए वह सुरक्षित रहेगी. मंत्रालय की ओर से जारी हुए बयान में कहा गया है कि बैंकों को वित्तीय सहायता देने या समाधान में मदद करने के सरकार के अधिकार को किसी तरह से कम नहीं किया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक से सरकारी बैंकों के संबंध में सरकार की निहित गारंटी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

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