नई दिल्ली. एक निजी समाचार चैनल की माने तो अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने 24 साल बाद किसी को अपना इंटरव्यू दिया है. दरअसल गुजराती न्यूज चैनल ‘निर्माण’ ने इंटरव्यू के जरिए दाऊद इब्राहिम से जुड़ी कई बातों का खुलासा करने का दावा किया है. ‘निर्माण’ ने इस पूरे इंटरव्यू की जानकारी मीडिया से साझा की है. 

‘निर्माण’ ने दाऊद इब्राहिम से यह भी पूछा कि किस तरह यकीन किया जाए कि आप दाऊद ही बोल रहे हैं? दाऊद से पूछा गया, ‘आपने आखिरी बार किस रिपोर्टर को अपना इंटरव्यू दिया था, क्या आप यह बता सकते हैं? इसके जवाब में दाऊद ने सही जवाब देते हुए कहा, ‘मैंने आखिरी बार 24 साल पहले इंडिया टुडे को अपनी आवाज में इंटरव्यू दिया था.’

दाऊद इब्राहिम से ‘निर्माण’ की बातचीत के प्रमुख अंश:

सवाल- मैं पत्रकार पद्मकांत त्रिवेदी बोल रहा हूं?
दाऊद- नमस्कार जी पत्रकार महोदय, मैं बहुत इज्जत करता हूं हर पत्रकार की.

सवाल- आप दाऊद इब्राहिम ही बोल रहे हो?
दाऊद- जी हां, कोई शक.

सवाल- आपने लास्ट इंटरव्यू कौन से पत्रकार को दिया था, वो नाम आप बता सकेंगे, क्योंकि मैं भरोसा कर भी लूं, पर हमारे दर्शक कैसे भरोसा कर पाएंगे कि आप खुद बोल रहे हो?
दाऊद- लास्ट टाइम 24 साल पहले मैंने एक इंटरव्यू दिया था इंडिया टुडे को.

सवाल- शीला भट्ट को भी आपने इंटरव्यू दिया था?
दाऊद- मैंने कभी कोई रिकॉर्डेड इंटरव्यू नहीं दिया था, प्रिंट मीडिया को.  

सवाल- अच्छा, अभी रमजान का महीना चल रहा है और मैं ये भरोसा करूंगा कि आप रमजान महीने में जो भी बोलेंगे, मेरे साथ जो भी बातचीत करेंगे, आप सच्चाई ही बताएंगे.
दाऊद- जी मुझे (आवाज साफ नहीं) का डर नहीं है, फांसी चढ़ने का डर नहीं है, अगर होता तो मैं आपसे बात ही नहीं करता. और ये क्रिमिनल इंटेरोगेशन थोड़ी है. थोड़ी बहुत तो इज्जत रखो…

सवाल- अभी पाकिस्तान ये बोल रहा है कि आप पाकिस्तान में नहीं हैं और भारत सरकार दावा कर रही है कि आप पाकिस्तान के कराची में हो. आप कराची में रहते हो, पाकिस्तान में रहते हो…आप कहां पर रहते हो…आप बताएंगे?
दाऊद- जी देखिए, ये सारी नौबत आती ही नहीं, अगर कुछ साल पहले भारत सरकार मेरी बात मान ली होती. हमारी जेठमलानी जी से बात हुई थी . आप अगर उनसे कॉन्टैक्ट कर पाएं, तो उनसे पूछिएगा कि मैं इंडिया आने के लिए रेडी था.

सवाल- अभी हिंदुस्तान के मशहूर वकील राम जेठमलानी ने ये दावा किया है कि आप उन्हें लंदन में मिले थे, क्या ये सच है?
दाऊद- जी, उनके पास सारी डिटेल्स मेरी अवलेबल है.

सवाल- राम जेठमलानी ने ये दावा किया था कि उस वक्त आप सरेंडर करना चाहते थे, मगर ‘नो जेल- नो टॉर्चर’ की आपने शर्त रखी थी, जिसे शरद पवार ने नकार दिया, क्या ये सच है?
दाऊद- मेरी सिर्फ इतनी…मुझे सिर्फ इतना ही चाहिए था कि बम ब्लास्ट में मेरा नाम न हो. मैंने काम…मैं मासूमों की जान नहीं लेता हूं. हां लेकिन जो भी मेरे धंधे के आड़े आएगा, मैं उसे भी नहीं छोडूंगा.

सवाल- मगर अमेरिका भी मानता है कि अलकायदा जैसे टेररिस्ट ग्रुप से आपका लिंक है, इंटर स्टेट ने आपको 2003 में ग्लोबल टेररिस्ट करार दिया है, तो अमेरिका भी आपसे न्याय नहीं कर रहा है, आपका ये कहना है?
दाऊद- जी मैं सिर्फ बिजनेसमैन हूं, सिर्फ बिजनेस जानता हूं, और इसके अलावा कौन आतंकवादी है, कौन क्या है, इसका मुझसे कुछ लेना-देना नहीं है.

सवाल- नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं और जबसे वो प्रधानमंत्री बने हैं, आपको डर लग रहा है. ऐसे में आपके खिलाफ यहां भी प्रचार होता है, जो आपके दुश्मन हैं, वो लोग भी यही बोलते हैं. क्या ये सही है?
दाऊद- जी अगर डर जैसी कोई बात होती, तो आप लोग मुझ तक पहुंचते ही नहीं, और मैं हिंदुस्तान में आकर बात कर रहा हूं.

सवाल- पत्रकार वेद प्रताप वैदिक हाफिज सईद से मिले थे, क्या आपसे मिलने की कोशिश की थी?
दाऊद- जी देखिए, मैं आपसे उतने डीटेल में बात नहीं करना चाहता हूं, कौन मुझे मिला था, कौन मुझसे नहीं मिला था, किसने मुझसे मिलने की कोशिश की थी. मैं सिर्फ ये बातें आपको क्लियर करना चाहता हूं कि मैं सिर्फ बिजनेसमैन हूं और सिर्फ धंधा करना जानता हूं.

सवाल- आप धंधा करना चाहते हैं, आप क्रिमिनल नहीं हैं, 93 के ब्लास्ट में आप शामिल नहीं थे. ये आपका कहना है, मगर ललित मोदी के पास से 1 हजार रुपया. आप आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में भी आपका नाम उछाला गया है. क्या ये सच है कि आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में आप भी थे?
दाऊद- जी देखिए, मेरा नाम का इस्तेमाल पूरी दुनिया ने किया है. हर कोई डॉन बनना चाहता है और जो भी है, अगर मैं कबूल करता हूं या मान लेता हूं, तो इस चीज से तो मेरी मार्केट वैल्यू बढ़ जाती है कम नहीं होती.

सवाल- ललित मोदी के पास से आपने 1 हजार करोड़ रुपये मांगे थे और उन्होंने दिए भी ये सही है?
दाऊद- जी वो मसला…मसला पूरा अलग था, वो मेरे धंधे की बात थी. इसके अलावा मुझे उसका कोई लेना-देना नहीं था.

सवाल- 2003 की मैं बात कर रहा हूं. दिलीप वेंगसरकर ने कहा था कि कि 1996 में दाऊद इब्राहिम शारजहां में जो मैच खेला जा रहा था, इंडियन टीम के ड्रेसिंग रूम में दाखिल हुए थे और सभी प्लेयर्स को एक-एक कर ऑफर किया था..पाकिस्तान को मैच हराते हो, क्या ये सच है दिलीप वेगसरकर का दावा?
दाऊद- मेरा बॉलीवुड और क्रिकेट से पुराना रिश्ता है. मैं इन दोनों ही चीजों को पसंद करता हूं और ये अलग बात है कि उससे… ये बातें मुझे आपको बताने की जरूरत नहीं है ये पूरी दुनिया जानती है.