लखनऊ: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ मंगलवार को दिल्ली आएंगे, योगी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मंत्रियों के मंत्रालय पर चर्चा करेंगे, इस बैठक के बाद ही मंत्रियों के विभाग का ऐलान किया जाएगा. योगी सरकार में मंत्रियों के बीच काम-काज का बंटवारा फिलहाल नहीं हुआ है. इंडिया न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक केशव मौर्य और दिनेश शर्मा को भारी-भरकम मंत्रालय दिए जा सकते हैं.
 
दोनों डिप्टी सीएम को मिलेंगे बड़े विभाग
योगी सरकार में दूसरे नंबर पर माने जा रहे केशव प्रसाद मौर्य को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है. अगर सीएम गृह मंत्रालय अपने पास रखते हैं तो मौर्या को PWD और सिंचाई जैसे बड़े विभाग सौंपे जा सकते हैं. डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को नगर विकास और वित्त दिया जा सकता है. लखनऊ के मेयर रहे दिनेश शर्मा के पास पर्याप्त प्रशासनिक अनुभव भी है. 
 
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स्वाति सिंह को भी मिल सकती है जिम्मेदारी
बीजेपी प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभा चुके श्रीकांत शर्मा योगी सरकार में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग संभाल सकते हैं. वहीं, शाहजहांपुर से लगातार 8वीं बार विधायक चुने गए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना को संसदीय कार्य विभाग दिया जा सकता है. मंत्रिमंडल में इकलौते मुस्लिम चेहरे मोहसिन रजा को अल्पसंख्यक कल्याण और हज विभाग दिए जाने की पूरी संभावना है. इसके साथ ही, आंवला सीट से चौथी बार चुनकर आए धर्मपाल सिंह को कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है. इसके अलावा, तीखे तेवर वाली स्वाति सिंह को महिला एवं बाल कल्याण मंत्री बनाया जा सकता है. 
 
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दिल्ली से यूपी के राज-काज पर नजर !
मंत्रालयों के बंटवारे के साथ ही अफसरों के फेरबदल पर हलचल शुरु हो गई है. सूत्रों की मानें तो रजनीकांत मिश्रा यूपी के अगले डीजीपी हो सकते हैं जो जावीद अहमद की जगह लेंगे. वहीं राजीव कुमार को यूपी का नया मुख्य सचिव बनाने की तैयारी है. राजीव कुमार इस समय केंद्र में तैनात हैं. सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी ने पीएमओ के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्र को यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी है.
 
नृपेंद्र मिश्रा पिछले दो दिनों से लखनऊ में हैं. वो योगी सरकार और पीएम के बीच कड़ी का काम करेंगे. अब योगी सरकार को पीएम के यूपी प्लान को आगे बढ़ाना होगा. उसका रोडमैप दिल्ली में तय होगा और योगी सरकार उसे लागू करेगी. इसे मिशन 2019 से जोड़कर भी देखा जा सकता है. 
 
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अंदर की बात
अंदर की बात ये है कि योगी के चार्ज संभालने से पहले ही नृपेंद्र मिश्रा एक्टिव हो गए थे. यूपी में अफसरों को समय से दफ्तर आने और संकल्प पत्र के साथ आने के निर्देश उनकी तरफ से ही दिए गए थे. दरअसल, पीएम मोदी चाहते हैं कि चुनावों में किए गए वादे उनकी निगरानी में पूरे किए जाएं. चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने लोगों से वादा किया था कि मुख्यमंत्री चाहे कोई भी हो वादों को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी होगी. इसी वादे को वो नृपेंद्र मिश्रा के जरिए पूरा कर रहे हैं. जहां तक नृपेंद्र मिश्रा की बात है तो वो यूपी कैडर के IAS अधिकारी हैं. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने उन्हें अपना प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाया था.