नई दिल्ली: जाट आरक्षण की आग हरियाणा से दिल्ली पहुंच गई है, जंतर-मंतर पर जुटे जाट समुदाय ने धमकी दी है कि अगर हमारी मांगे नहीं मानी गईं तो  20 मार्च को दिल्ली बंद करेंगे.  गुरुवार सुबह से ही दिल्ली के जंतर मंतर पर जाट समुदाय के लोगों का जमावड़ा शुरु हो गया. एक दिन के सांकेतिक धरने पर पहुंचे जाट समुदाय के हजारों लोगों ने केन्द्र और हरियाणा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और वादाखिलाफी का आरोप लगाया.
 
ये भी पढ़ें:
 
दिल्ली में 20 मार्च को करेंगे आंदोलन
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो 20 मार्च से अनिश्चितकालीन आंदोलन चलेगा. वह अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगी. अगर इसके बाद भी सरकार नहीं मानी तो संसद का घेराव करेंगे. 
 
ये भी पढ़ें:
 
क्या चाहता है जाट समुदाय ?
  • जाट समुदाय शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबोसी कोटे में आरक्षण की मांग कर रहा है
  • उनकी मांग है कि पिछले साल जाट आंदोलन के दौरान जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया था उन्हें रिहा किया जाए, इसके अलावा उन पर से मुकदमे वापस लिए जाएं
  • साथ ही आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाए
  • जाटों पर एक्शन लेने वाले अफसरों पर हो कार्रवाई
जाट समुदाय ने दी धमकी
अपनी मांगों को लेकर देशभर से दिल्ली पहुंचे जाट आंदोलनकारियों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए हैं. जाट नेताओं ने ऐलान किया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वो होली के बाद से असहयोग आंदोलन करेंगे. असहयोग आंदोलन के तहत दिल्ली को जरुरी चीजों की सप्लाई बंद करने की धमकी दी गई है. साथ ही दूध की सप्लाई रोकने की भी बात कही गई है. इसके अलावा जाटों से अपील की गई है कि वो बिजली और पानी का बिल ना भरें. 
 
ये भी पढ़ें: U
 
पिछले जाट आंदोलन ने क्या दिया ?
पिछले साल हरियाणा में हुए जाट आंदोलन में बड़ा नुकसान हुआ था. हरियाणा के अलग-अलग जिलों में चले जाट आंदोलन में  30 लोग मारे गए थे. जबकि 200 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे. पूरे आंदोलन के दौरान हजारों करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ था. 
 
ये भी पढ़ें:
 
अंदर की बात
अंदर की बात ये है कि हरियाणा के जाट आंदोलन का भविष्य यूपी चुनाव के नतीजों से तय होगा. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल इलाकों में अगर बीजेपी का पलड़ा भारी रहा, तो जाट आंदोलन की धार थोड़ी कुंद होगी और अगर ऐसा नहीं हुआ तो जाट आंदोलन के नाम पर हरियाणा और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की राजनीति तेज़ हो जाएगी. यही वजह है कि दिल्ली में सांकेतिक प्रदर्शन के बाद जाट आंदोलन की अगली तारीख 20 मार्च तय की गई है, क्योंकि तब तक यूपी के जाटलैंड की ज़मीनी सच्चाई सबके सामने होगी.