नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आंकड़े पेश कर दिए हैं लेकिन जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया गया हैं. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आंकड़ों के बारे में कहा कि  इन आंकड़ों की मदद से योजनाएं बनाने में काफी मदद मिलेगी. जेटली ने इन आंकडो़ं को एक शानदार दस्तावेज बताया है.

सरकार  का मानना है कि इस तरह की जनगणना से आसानी से पता चल सकता है कि किस समुदाय की कितनी भागीदारी है और उसके लिए क्या कुछ और किया जा सकता है. जाति आधारित जनगणना का फैसला मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने लिया था. हालांकि उस समय इसकी यह कहकर आलोचना भी की गई थी कि इससे सामाजिक सौहार्द खराब हो सकता है.