नई दिल्ली. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे को आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की मदद करने के कारण विवादों में फंसने के बाद दोनों को संघ से फिलहाल राहत मिलते हुए दिखाई दे रही है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि संघ ने सरकार से कहा है कि वह विपक्ष के दबाव में ना आए. उसका कहना है कि बिहार चुनाव तक वह किसी मंत्री का इस्तीफे को नहीं कहेगा. संघ ने साफ कर दिया है कि वह अभी सुषमा-वसुंधरा पर कार्रवाई नहीं चाहता है.

बीजेपी क्या सोचती है?
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में ज्यादातर का मानना है कि वसुंधरा राजे से इस्तीफा लेते ही कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का मनोबल बढ़ेगा. इसके बाद विपक्ष की तरफ से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और महाराष्ट्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री पंकजा मुंडे से इस्तीफा लेने का दबाव बढ़ जाएगा.

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वसुंधरा राजे की ही तरह सुषमा स्वराज पर भी ललित मोदी की मदद करने का आरोप है. स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर कोर्ट में मुकदमा चलने लगा है वहीं पंकजा मुंडे पर महाराष्ट्र में घोटाले का आरोप लगा है.

जुलाई में शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र को शांति से चलाना सरकार की जरूरत है क्योंकि कई महत्वपूर्ण बिल एजेंडा पर हैं. विपक्ष को मनाने का रास्ता पार्टी को फिलहाल समझ में नहीं आ रहा है. पार्टी या सरकार के लिए वसुंधरा का इस्तीफा लेना या नहीं लेना ललित विवाद से ज्यादा संसद के मॉनसून सत्र को लेकर उसकी रणनीति का हिस्सा होगा.

दूसरी तरफ जयपुर में वसुंधरा राजे ने गुरुवार को करीब दो दर्जन विधायकों से मुलाकात की जिनमें कई उनकी कैबिनेट के मंत्री हैं. वसुंधरा केंद्रीय नेतृत्व को यह दिखाने की कोशिश कर रही हैं कि विधायकों का समर्थन उनके पास है और वो पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं.

राजे समर्थक और राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौर ने गुरुवार को वसुंधरा से मुलाकात के बाद कहा कि पार्टी पूरी तरह से मुख्यमंत्री के साथ हैं और उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं है.