नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र जब से शुरू हुआ है रोज ही किसी-न-किसी मुद्दे पर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हो रहा है. अभी तक नोटबंदी, नगरोटा हमले जैसे मुद्दों पर विपक्ष केंद्र सरकार को घेरने का काम कर रही थी तो शुक्रवार को संसद में पश्चिम बंगाल के टोल प्लाजा पर सेना की हलचल का मुद्दा छाया रहा.
 
 
रक्षा मंत्री ने लोकसभा में दिया जवाब
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों ने बंगाल में सेना की तैनाती का मुद्दा उठाया. जिसका जवाब देते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने  कहा कि यह सेना का रूटीन अभ्यास है. ये पिछले साल यानी 2015 में भी ऐसा हुआ था और सेना को इस तरह राजनीति में घसीटना गलत है, इसको मुद्दा बनाना गलत है. पर्रिकर ने कहा कि सेना ने ममता के सेना पर लगाए आरोपों से दुख हुआ. यह मुद्दा केवल और केवल राजनीतिक हताशा के कारण ही उठाया गया है.
 
 
राज्यसभा में भी उठा मुद्दा
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने इस मामले पर राज्यसभा में कहा कि सेना तैनात करना चिंता का विषय है, आखिर इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी. मायावती ने राज्यसभा में कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ ज्यादती हो रही है. सेना तैनात करना भारतीय संविधान पर बहुत बड़ा हमला है. सेना का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए.
 
 
राज्यसभा 2:30 बजे तक के लिए स्थगित
सेना तैनाती के मुद्दे पर विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है. वहीं लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई थी और अब इसे कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.
 
 
ममता ने बताया इमरजेंसी जैसे हालात
बता दें कि ममता बनर्जी ने कोलकाता के नबन्ना, दनकुनी और पलसित के टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती पर नाराजगी जताई थी. ममता ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार को बिना किसी पूर्व  सूचना के इस तरह सेना को तैनात किया जाना एक गंभीर मुद्दा है. राज्य में इमरजेंसी जैसे हालात पैदा हो गए हैं. उन्होंने इस तरह सेना की तैनाती को असंवैधानिक बताते हुए राष्ट्रपति से मोदी सरकार की शिकायत करने का मन भी बनाया है.