नई दिल्ली : संसद का शीतकालीन सत्र जब से शुरू हुआ है रोज ही किसी-न-किसी मुद्दे पर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा हो रहा है. अभी तक नोटबंदी, नगरोटा हमले जैसे मुद्दों पर विपक्ष केंद्र सरकार को घेरने का काम कर रही थी तो आज संसद में पश्चिम बंगाल में तैनात की गई सेना का मुद्दा छाया रहा.
 
कोलकाता में स्थित राज्य सचिवालय नबन्ना के पास और दनकुनी के पास टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती के मुद्दे पर संसद के दोनों ही सदनों में जोरदार हंगामा हुआ. बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के साथ ज्यादती हो रही है. 
 
 
राज्यसभा में बोलीं मायावती- ये ज्यादती है
मायावती ने राज्यसभा में कहा कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ ज्यादती हो रही है. सेना तैनात करना भारतीय संविधान पर बहुत बड़ा हमला है. सेना का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए.
 
नबी आजाद बोले- सेना तैनात करने की जरूरत क्यों पड़ी ?
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने इस मामले पर राज्यसभा में कहा कि सेना तैनात करना चिंता का विषय है, आखिर इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी.
 
 
राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर राय ने भी सेना तैनाती के मुद्दे पर विरोध जताते हुए कहा है कि बंगाल की जनता इस तानाशाही के खिलाफ लड़ेगी.
 
लोकसभा में भी उठा ‘सेना तैनाती’ का मुद्दा
राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी सेना तैनात करने का मुद्दा उठा. टीएमसी ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है. साथ ही कहा है कि ऐसा क्यों किया गया.
 
पर्रिकर ने दिया जवाब
लोकसभा में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने जवाब देते हुए कहा कि यह एक नियमित प्रक्रिया है. यह सेना का रूटीन अभ्यास है. पिछले साल यानी 2015 में भी ऐसा हुआ था.
 
राज्यसभा 2:30 बजे तक के लिए स्थगित
सेना तैनाती के मुद्दे पर विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है. वहीं लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई थी और अब इसे कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.
 
 
बता दें कि प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममती बनर्जी की मांग पर राज्य सचिवालय नबन्ना के पास स्थित टोल प्लाजा से सैन्य कर्मियों को हटा लिया गया है. यहां तक कि सेना की टेंपररी शेड को भी हटाया जा चुका था. वहीं शुक्रवार सुबह सात बजे तक की खबरों के अनुसार ममता सचिवालय में ही डेरा जमाई हुई हैं. उन्होंने इस तरह सेना की तैनाती को असंवैधानिक बताते हुए राष्ट्रपति से मोदी सरकार की शिकायत करने का मन भी बनाया है.