नई दिल्ली: नोटबंदी के तमाम नकारात्मक प्रभावों में से एक सेकंड हैंड कारों के बिजनेस में गिरावट आना भी शामिल है. देश में फिलहाल इस समय सेकंड हैंड गाड़ियों की बिक्री में 70-80 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल रही है.
 
इसकी बड़ी वजह यह है कि सेकंड हैंड गाड़ियों की मार्किट में ज्यादातर लेन देन कैश में होता है और नोटबंदी के बाद देश भर में कैश की बड़ी किल्लत देखने को मिल रही है. इसकी वजह से सेकेंड हैंड कारों की दुकानों में आजकल सन्नाटा छाया हुआ है. 
 
इस बात की पुष्टि खुद दुकानदार भी करते हैं.दुकानदारों का कहना है कि पहले वह हर महीने कम से कम 25 कारें बेच लेते थे लेकिन अब डिमांड घट जाने से दुकानदार गाड़ियों के दाम कम करने के लिए मजबूर हुए हैं. गाड़ियों की बात करें तो यूज्ड हैचबैक कारें जहां 10 से 15 हजार रुपये सस्ती हुई हैं, वहीं सेडान सेगमेंट में दाम 20 हजार तक कम हुए हैं.
 
बावजूद इसके पुरानी कारों के डीलर समझ नहीं पा रहे हैं कि किस तरह वह ग्राहकों को वापस बुला सकें. जानकारों का मानना है कि सभी कुछ वापस ठीक होने में करीब-करीब दो महीने का समय लगेगा.