नई दिल्ली: काले धन पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला किया. इसके बाद लोग अपने काले धन को सफेद करने की कवायद में जुटे हुए हैं. ऐसा ही एक मामला अब दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी में नोटबंदी के बाद देखने को मिला है. जहां करीब 8 करोड़ रुपये काले धन को सफेद करने का मामला सामने आया है.
 
दरअसल 500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद डीटीसी बस कंडक्टर ने 9 से 19 नवंबर तक यात्रियों से पुराने नोट जमा किए हैं. नोटबंदी के बाद मनाही के बावजूद डीटीसी कंडक्टर ने 500 और 1000 के नोट यात्रियों से लेकर सरकार के खाते में जमा कराए हैं.
 
दिल्ली सरकार को संदेह
वहीं दिल्ली सरकार को इस बात का संदेह है कि यात्रियों ने वैध नोट ही कंडक्टर को दिए होंगे लेकिन टिकट कलेक्शन के नाम पर कंडक्टर या डीटीसी अधिकारियों ने इस तरीके से काले धन को सफेद करने का रास्ता खोज निकाला होगा और पुराने नोट सरकार के खाते में जमा करा दिए होंगे. संदेह के घेरे में आई डीटीसी पर दिल्ली सरकार ने 19 नवंबर को जांच के आदेश भी दे दिए थे.
 
करोड़ों में है आकंड़ा
शुरुआती जांच में सामने आया कि 40 में से 20 डीटीसी डिपो से बैंकों में टिकट कलेक्शन के नाम पर 500 और 1000 के पुराने नोट जमा हुए. इनमें 1000 रुपये के 33647 नोट और 500 रुपये के 95677 नोट जमा हुए हैं. इनके कुल मूल्य पर गौर किया जाए तो यह आंकड़ा 8 करोड़ 14 लाख 85 हजार 500 रुपये का बैठता है.
 
विभागों की भूमिका
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार का मानना है कि सिर्फ कंडक्टर अकेले ही इस तरह से काला धन सरकारी खाते में जमा नहीं करा सकते हैं. कंडक्टर के जरिए यात्रियों से किराए का पैसा वसूलने के बाद पैसा कैशियर, डिपो मैनेजर और अकाउंट विभाग की भी इसमें सीधे तौर पर भूमिका होती है. 
 
बता दें कि परिवहन मंत्री सत्येंद्र जैन ने ये मामला एसीबी को सौंपने के आदेश भी दे दिए हैं.