नई दिल्ली. कालेधन को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद जनधन खाते खुलवाने की जैसे होड़ सी लग गई. नोटबंदी के पहले ही हफ्ते में करीब 6.95 लाख नए जनधन खाते खोले गए.

इन खातों में 92 फीसदी खाते मतलब 6.41 खाते शहरी इलाकों में खोले गए. यहां गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले शहर में रहने वाले लोगों का रुझान जनधन खाते खुलवाने की तरफ इतना नहीं देखने को मिला था. अगस्त साल 2014 में यह जनधन की स्कीम लॉन्च हुई थी, उसके बाद से ही ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में इस स्कीम के प्रति रुझान देखने को मिला था.
नोटबंदी के करीब दो महीने पहले तक ग्रामीण क्षेत्रों में हर हफ्ते 9.20 लाख और शहरी इलाकों में 5.53 लाख नए जनधन खाते खुलवाए जाते थे, लेकिन 9 से 16 नवंबर के बीच मात्र एक हफ्ते में लोगों में इन खातों को खुलवाने की होड़ सी देखने को मिली.
 
 
बता दें कि नोटबंदी के फैसले के बाद से लोगों ने अपने पैसे जनधन खातों में जमा करना शुरू कर दिया था. नोटबंदी की घोषणा के बाद 13 दिन में ही 25 करोड़ खातों में 21 हजार करोड़ जमा कराए गए. नोटबंदी की घोषणा से पहले जनधन के खातों में केवल 45,636 करोड़ जमा थे. अब यह रकम 21 हजार करोड़ से बढ़कर 64, 252 करोड़ हो गई है.
 
इतनी बड़ी मात्रा में रकम जमा कराने के बाद यह कहा जाने लगा था कि जनधन में लोग अपना कालाधन जमा करा रहे हैं, जिसके बाद से आरबीआई ने जनधन खातों में 500 और 1000 के पुराने नोट जमा करने पर रोक लगा दी थी.