नई दिल्ली. भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसने के लिए ‘आप’ सरकार ने जो हेल्पलाइन- 1031 शुरू की थी, उसमें मिली शिकायतों के आधार पर महज 7 केस दर्ज किए गए हैं और करीब 7 आरोपियों की ही गिरफ्तारी हुई है. 5 अप्रैल को शुरू हुई इस हेल्पलाइन का यह आंकड़ा 27 मई 2015 तक है, जबकि सरकारी पोस्टरों पर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक आरटीआई में पूछे गए सवालों के जवाब में दिल्ली की ऐंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) की तरफ से खुलासा किया गया है कि हेल्पलाइन 1031 के शुरू होने से लेकर 27 मई 2015 तक इसके जरिए 261 शिकायतें मिलीं. इनमें आरोपियों के खिलाफ 7 मामले दर्ज किए गए और 7 आरोपियों को ही तब तक गिरफ्तार किया गया था. दूसरी तरफ शहरभर में जगह-जगह लगे आप सरकार के पोस्टरों को देखें तो उनमें अब तक 35 के करीब अधिकारियों के गिरफ्तार होने और 155 के आसपास अधिकारियों को सस्पेंड किए जाने का दावा किया जा रहा है.

मामले में आरटीआई दाखिल करने वाले आयानगर निवासी वेदपाल कहते हैं कि उन्होंने दिल्ली सरकार के पोस्टरों में किए जा रहे दावों की हकीकत का पता लगाने के लिए यह आरटीआई दाखिल की थी. आरटीआई में पूछे गए सवाल के जवाब में एसीबी ऑफिस ने जो जानकारी दी, उसमें और सरकारी दावे में जमीन आसमान का अंतर मिला.

वेदपाल ने 12 मई को दाखिल आरटीआई में एसीबी ऑफिस से पूछा था कि सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत दर्ज कराने के लिए दिल्ली सरकार ने जो हेल्पलाइन 1031 शुरू की थी, उसके जरिए अभी तक कितनी शिकायतें मिलीं, उन शिकायतों के आधार पर कितनी एफआईआर दर्ज की गई, कितने अधिकारी गिरफ्तार हुए और कितने केस सॉल्व हुए, कितने अनसॉल्व रहे? ऐंटी करप्शन ब्रांच के अडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस ने आरटीआई में पूछे गए सवालों का जवाब दिया है.

इससे पहले ऐडवोकेट विवेक गर्ग द्वारा फाइल की गई आरटीआई के जवाब में भी ऐंटी करप्शन हेल्पलाइन के जरिए महज सात केस दर्ज होने की बात सामने आई थी. गर्ग का कहना था, ‘केजरीवाल सरकार गलत आंकड़े देकर लोगों को बेवकूफ बना रही है. अगर सरकार के दावे के मुताबिक ऐंटी करप्शन हेल्पलाइन को एक महीने में एक लाख से ज्यादा कॉल मिली हैं तो एसीबी ने आरटीआई के जवाब में 282 कॉल मिलने की बात क्यों कही है?’

IANS से भी इनपुट