नई दिल्ली. योग दिवस पर मचे हंगामे के बीच पीएम मोदी को मुस्लिमों की बड़ी संस्था दारुल उलूम से समर्थन मिला है. दारुल उलूम ने कहा है कि योग को किसी तरह के महज़ब से जोड़ कर नही देखना चाहिए. इसके खिलाफ किसी तरह का फ़तवा जारी नही करना चाहिए. योग एक व्यायाम है.
  
दारूल उलूम के प्रवक्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह सूर्य नमस्कार का समर्थन बिल्कल नहीं करते.  उन्होंने कहा कि इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की इबादत करने की बात कही गई है. इसलिए सूर्य नमस्कार का समर्थन और इबादत हम नहीं कर सकते. लेकिन योग से कोई दिक्कत नहीं है अगर इसे एक व्यायाम के तौर पर किया जाए. योग को सियासत और ताकत के लिए अगर उपयोग किया जाएगा तो निश्चित तौर पर मुस्लिमों को दुख होगा.
 
21 दिवस को सरकार के योग दिवस मनाने पर उन्होंने कहा कि किसी के साथ कोई जोर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए. अगर किसी को योग करने में कोई दिक्कत नहीं है तो वो करे. लेकिन योग किसी पर जबरदस्ती नहीं थोपा जाना चाहिए. वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खालिद रशीद फिरंगीमहली ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 21 दिवस पर हो रहे योग दिवस का विरोध नहीं किया है. अगर योग से किसी तरह के धार्मिक क्रियाकलापों को नहीं जोड़ा जाता है,या कोई मंत्र उच्चारण और सूर्य नमस्कार नहीं होता है और सिर्फ वर्जिश के तौर पर किया जाता है तो कोई इसकी मुखालफत नहीं कर रहा. इसके पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था योग को धर्म से जोड़े जाने का विरोध करेंगे. वहीं कल द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा था योग से सूर्य नमस्कार को मुस्लिमों के वीटो के कारण हटाया जाना गलत है.
 
क्या है दारूल उलूम?
दारूल उलूम मुस्लिमों की धार्मिक शैक्षणिक संस्था है. दारुल उलूम इस्लाम की शिक्षा के लिए मशहूर है. इसका मुख्यालय यूपी के सहारनपुर जिले के देवबंद में है. आजादी की लड़ाई में दारूल उलूम का अहम यागदान रहा है.