फैजाबाद. फर्जी डिग्री मामले में फंसे दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को लेकर बुधवार को राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय पहुंची दिल्ली की पुलिस की टीम ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया. करीब चार घंटे तक साक्ष्यों के सत्यापन और तोमर से पूछताछ के बाद विवि ने फिर साफ किया कि पूर्व मंत्री की स्नातक की डिग्री फर्जी है.

यूनिवर्सिटी का दावा, फर्जी है डिग्री
विवि के मीडिया प्रभारी डॉ एसएन शुक्ला के मुताबिक आरटीआइ में मांगी गई जानकारी पर जो जवाब अवध विवि प्रशासन का था, वह उस पर कायम हैं. रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचने के बाद दिल्ली पुलिस ने दस्तावेजों को मांगने के लिए विवि को आवेदन पत्र दिया. इसके बाद वर्ष 1986, 1987 व 1988 के दस्तावेजों को खंगाला जाना आरंभ किया गया. टीम ने विवि से नामांकन प्रक्रिया, परीक्षा, नतीजा घोषित करने का तरीका, अंकपत्र व डिग्री बनाने का मूल दस्तावेज मांगा. इसे उपलब्ध करा दिया गया. इसके बाद तीन सालों के दस्तावेजों को एक-एक करके तोमर के सामने ही पलटा जाना शुरू किया गया.

विवि के अधिकारियों ने तोमर से जरूर कुछ सवाल किए, लेकिन तोमर ज्यादातर वक्त खामोश ही रहे. असली दस्तावेजों के सामने ज्यादातर मौकों पर तोमर की बोलती बंद रही है. पता चला है कि पुलिस यहां से अंक, नामांकन व परीक्षा से संबंधित वर्ष 1986 से 1988 तक के दस्तावेज सील करके ले गई है. दिल्ली पुलिस ने तोमर के सामने हुई छानबीन की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई है.

IANS से भी इनपुट