नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने प्रदेश के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की गिरफ्तारी को पूरी तरह कानून-सम्मत बताया है और राजनीतिक दबाव के आरोपों को खारिज किया है. पुलिस ने बताया कि मामले में बार काउंसिल की तरफ से 11 मई को शिकायत की गई थी और पूरी जांच-पड़ताल में जितेंद्र तोमर की बीएससी और एलएलबी की डिग्रियां फर्जी पाई गईं.

पुलिस ने बताया कि 8 जून को एफआईआर दर्ज की गई और अगली सुबह जितेंद्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि पुलिस ने एफआईआर दर्ज किए जाने का समय बताने से इनकार कर दिया. दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि जितेंद्र तोमर को गिरफ्तारी से पहले नोटिस भी भेजा गया था. नोटिस किस समय जारी किया गया यह पूछने पर स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर दीपक मिश्रा ने कहा कि तफ्तीश से जुड़ी ज्यादा तकनीकी जानकारियों के बारे में बताना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के लिए यह केस एक शुद्ध एफआईआर का मामला है और इसके पीछे किसी और तरह की मंशा नहीं निकाली जानी चाहिए.

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने बताया कि बार काउंसिल ने 11 मई को शिकायत दी थी कि जितेंद्र तोमर ने खुद को वकील दर्शाने के लिए जो डिग्रियां सबमिट की हैं, वे फर्जी लगती हैं. पुलिस ने दोनों डिग्रियों की जांच के लिए दो अलग-अलग टीमें बनाईं और ये टीमें वेरिफिकेशन के लिए संबंधित यूनिवर्सिटीज में भेजी गईं. राजन भगत ने बताया, ‘इनमें जो रोल नंबर मेंशन था, उस नाम से कोई डिग्री या मार्कशीट जारी ही नहीं की गई. तफ्तीश में यह पता लगा कि उनकी एलएलबी की प्रोफेशनल डिग्री में जो रोल नंबर लिखा हुआ था, वह किसी और छात्र का है. जो दस्तखत डिग्री और मार्कशीट पर हैं, वे भी फर्जी पाए गए हैं. कोई माइग्रेशन सर्टिफिकेट बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से भी उन्हें नहीं इशू किया गया.’ जल्दबाजी में गिरफ्तारी के आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने कहा, ‘हमने बिना किसी जल्दबाजी के पूरी पड़ताल करके कार्रवाई की है. मंत्रियों को गिरफ्तार करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया है.’

IANS से भी इनपुट