अयोध्या.   उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसको लेकर सियासी रस्साकस्सी तेज हो गई है. लेकिन अगर चुनाव यूपी में हो और बात अयोध्या की न हो, तो यह मुमकिन नहीं है. केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा अयोध्या का दौरा मंगलवार को करके आ चुके हैं.
 
वो केंद्र सरकार की ओर से बनाए जाने वाले रामायण संग्रहालय के लिए जमीन का मुआयना करने गए थे. इस दौरान उन्होंने ने दर्शन भी किए और राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से भी मुलाकात की.
 
हालांकि वह शुरू में रामायण संग्रहालय को चुनाव की नजर से देखने पर मना करते रहे. उनका कहना था कि केंद्र सरकार अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है.

यह विकास के एजेंडे में है. लेकिन जैसी महंत नृत्य गोपाल दास ने उनसे मिलकर राम मंदिर का मुद्दा उठाया तो केंद्रीय मंत्री के भी सुर बदल गए.
 
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा ‘मन बन चुका है, माहौल बन चुका है’. मतलब साफ है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे को एक बार फिर गरमाने से नहीं चूकेगी.
 
बीजेपी के ‘राष्ट्रीय राम’
राम के नाम पर बीजेपी ने कई बार प्रतिद्वंदियों को पटखनी दिया है. उत्तर प्रदेश में तो एक वक्त ऐसा था कि बीजेपी के विरोध का मतलब राम का विरोध था. कांग्रेस तो बीजेपी की इस प्रतीकात्मक लड़ाई से भी जीत ही नहीं पाई. 
 
एक वरिष्ठ पत्रकार से बातचीत में कांग्रेस के नेता और पूर्व स्वर्गीय प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव ने कहा था ‘बीजेपी हमेशा प्रतीकों के सहारे चुनाव लड़ती है.  राम को उसने अपना प्रतीक बना लिया है और पूरी पार्टी उसी के पीछे खड़ी है. बीजेपी से तो लड़ा जा सकता है लेकिन राम से कौन लड़े.’
 
बीजेपी ने राम को राष्ट्रवाद से भी जोड़ा और बहुमत से न सही लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी केंद्र में सरकार ‘हिंदुत्व की बहार’ का ही नतीजा था.
 
लेकिन इस बार सामने हैं सपा के ‘अंतरराष्ट्रीय’ राम
इसे सिर्फ संयोग तो नहीं कहा जा सकता है कि रामायण संग्रहालय की जमीन का मुआयना करने जा रहे केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा के दौरे से एक दिन पहले ही यूपी कैबिनेट ने अयोध्या में इंटरनेशन थीम पार्क बनाने की घोषणा कर दी.

इसमें वाटर फॉल होंगे. मूर्तियां होंगी और रामाणय से जुड़े ग्राफिक्स लगाए जाएंगे. साफ है मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हिंदुत्व की राजनीति की नब्ज पकड़ने की कोशिश की है.

उनको पता है कि 2014 में लोकसभा चुनाव में नारा भले ही विकास का रहा हो लेकिन वास्तव में पीएम मोदी ही मौजूदा राजनीति के सबसे बड़े हिंदूवादी चेहरे हैं और इसका असर इस चुनाव में बखूबी दिखा था.
 

राहुल गांधी भी कर आए दर्शन
यूपी किसान यात्रा लेकर निकले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी अयोध्या जाकर हनुमान गढ़ी दर्शन कर आए. राजीव गांधी के बाद वह ऐसे पहले कांग्रेस के नेता थे जो अयोध्या पहुंचे थे.

हालांकि राहुल इस दौरे में विवादित स्थल से दूरी बनाए रखी क्योंकि कांग्रेस को साफ पता है कि राजनीति में ‘अयोध्या’ उसे काभी रास नहीं आई. राम  मंदिर का मुद्दा उसके लिए ‘एक ओर कुआं और दूसरी ओ खाईं’ वाला है.
 

क्या कहता है चुनावी गणित
यूपी की सियासत को अयोध्या हर चुनाव को प्रभावित किया है. बीजेपी की जीत और हार अयोध्या ही तय करती है. पूर्वांचल में सिर्फ आजमगढ़ की लोकसभा सीट छोड़कर सारी सीटें बीजेपी के पास हैं.

वहीं अगर विधानसभा सीटों की बात करें तो 2012 में हुए चुनाव में अयोध्या के पास पड़ने वाली सीटें  फूलपुर पवई, दीदारगंज, लालगंज मिल्कीपुर, बीकापुर, गोसाईंगंज, कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर, अकबरपुर, आजमगढ़, निजामाबाद, अतरौलिया, और सगड़ी, आदि विधानसभा सीटें  सपा के खाते में गई थीं. 
 

एेसे में सपा कभी नहीं चाहेगी कि बीजेपी हिंदुत्व के रथ पर सवार होकर इन सीटों में सेंध लगा दे. इसलिए वह इस थीम पार्क के जरिए यहां की जनता के सामने ‘हिंदुत्व विरोधी’ छवि को तोड़ना चाहती है जैसा कि उसके बारे में बीजेपी हर करने में कामयाब होती रही है.
 
विनय कटियार ने कहा- लॉलीपॉप
फैजाबाद से सांसद रह चुके बीजेपी नेता और अब राज्यसभा सांसद विनय कटियार महेश शर्मा के दौरे के बाद से ही चर्चा में हैं. दरअसल उन्होंने केंद्र सरकार के रामायण पार्क पर ही सवाल उठा दिए हैं. उनका कहना है ‘यह सिर्फ लॉलीपॉप है. हमें राम मंदिर के सिवाए कुछ और मंजूर नहीं है.’ कटियार के इस बयान के पीछे माना जा रहा है कि बीजेपी मंदिर मुद्दे को फिर से लोगों के जुबान पर लाना चाहती है.
 
मायावती ने कहा- चुनाव से पहली सबको याद आई रामधुन
बीएसपी ने सुप्रीमो मायावती ने केंद्र के रामायण पार्क और सपा के इंटरनेशनल थीम पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले सबको रामधुन याद आ रही है. केंद्र और राज्य सरकार सिर्फ इससे लाभ लेना चाहती हैं. दोनों की मंशा ठीक नहीं है.