नई दिल्ली. केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को फर्जी डिग्री मामले में पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान उस याचिका को खारिज किया है, जिसमें ईरानी को समन करने की मांग की गई थी.
 
याचिका में मांग की गई थी कि ईरानी ने चुनाव आयोग को अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में कथित तौर पर झूठी जानकारी दी थी, इसलिए उन्हें समन किया जाये.
 
कोर्ट ने इस मामले में आज सुनवाई के दौरान कहा कि सबसे जरूरी बात तो यह है कि असली दस्तावेज समय के साथ खो गए हैं और जितने भी दस्तावेज उपलब्ध हैं वह ईरानी को समन भेजने के लिए काफी नहीं हैं. 
 
 
साथ ही साथ शिकायतकर्ता से कहा गया है कि इस मामले को दाखिल करने में 11 साल लग गए, जिससे साफ होता है कि मंत्री को परेशान करने की मंशा से शिकायत की गई है. 
 
इस मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्मृति ईरानी के सर्टिफिकेट मांगे थे. चुनाव आयोग ने सारे सर्टिफिकेट कोर्ट में जमा करा दिए थे. कोर्ट ने चुनाव आयोग से ये सारे सर्टिफिकेट एविडेंस एक्ट की धरा 65 बी के तहत पेश करने को कहा था. 
 
बता दें कि स्मृति पर आरोप था कि उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान दायर अपने हलफनामे में गलत सर्टिफिकेट उपलब्ध कराये थे. 
 
शिकायतकर्ता लेखक अहमद खान की ओर से दी गई दलीलों में कहा गया था कि स्मृति ने 2004 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए और 2011 में गुजरात से नामांकन दाखिल करने में डीयू से ही बीकॉम, पार्ट 1 को अपनी शैक्षणिक योग्यता बताया है.