नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के द्वारा कावेरी मुद्दे पर गठित कमेठी ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. अब इस मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी. सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट में सामाजिक और तकनीकी पहलुओं को बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक और तमिलनाडु में पानी की कमी को लेकर किसान बदहाल है. किसान और मछुवारे के सामने बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे है. 
 
सामाजिक पहलू
कर्नाटक के मंड्या जिले में बड़ी संख्या में खुदकुशी के मामले सामने आये है. कर्नाटक सरकार ने कावेरी बेसिन के 48 तालुका में से 42 तालुका में केंद्र सरकार के गाइड लाइन के तहत सूखा घोषित किया है. कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्यो को तमिलनाडु और पुडुचेरी में सिंचाई के लिए लोगों के हित के लिए काम करना चाहिए और कर्नाटक के विकास के बारे में सोचना चाहिए। साथ ही राज्य के लोगों को इस बाबत शिक्षित करना चाहिए.  
 
तकनीकी पहलू
*पानी के वितरण के लिए जो तकनीक लगाई गई है वो पुरानी है. पानी के मोल को किसी ने नहीं समझा.
*किसानों को दिए जाने वाले पानी का तरीका एक सदी पुराना है. इस लिए पानी की कमी को दूर करने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए. पानी के बंटवारे के लिए पाइप का इस्तेमाल करना चाहिए.
*समुद्र के तट के इलाकों में भूमिगत जल का इस्तेमाल नहीं हो सकता क्योंकि समुद्र की वजह से पानी नमकीन हो जाता है इसलिए मैटुर जलाशय से ही सिंचाई संभव है.
*तमिलनाडु सरकार की खेती को दी जाने वाली सब्सिडी की सुविधा तभी सफ़ल हो सकती है जब फ़सल के समय पूरा पानी उपलब्ध हो.
*पीने के पानी के लिए बंटवारे सिस्टम में बेहतरी लाने की जरूरत है. पानी के बहाव और कटाव के लिए ऑटोमैटिक वॉटर मैनजेमेंट सिस्टम लगाने की जरूरत है. 
*सम्बन्धित राज्यो के सिचाई प्रबंधन को किसानों के बीच पानी के बराबर बंटवारे की जरूरत है.