लखनऊ. आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) में मचा घमासान शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. यादव परिवार में चल रही जंग में शनिवार उस वक्त एक नया मोड़ आ गया जब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के चचेरे भाई शिवपाल यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफदारी में मुलायम सिंह को एक खत लिखा. इसके बाद मुलायम सिंह दिल्ली में रामगोपाल के घर पहुंचे यहां पर दोनों के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत हुई. 
 
शिवपाल यादव ने खत में लिखा कि अखिलेश को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार नहीं बनाना गलती होगी. उन्होंने खत में आगे लिखा कि आपने समाजवादी पार्टी को कड़ी मेहनत से बनाया था. आपकी वजह से पार्टी चार बार सत्ता में भी पहुंची. पार्टी को पिछली बार किसी अन्य दल के समर्थन की भी आवश्यकता नहीं पड़ी.
 
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने जो काम किए हैं वो पूरे देश के लिए मार्गदर्शक के लिए काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री जी इस समय निर्विवाद रूप से राज्य के सबसे बड़े लोकप्रिय नेता हैं, लेकिन हाल ही के कुछ दिनों में जो भी कुछ हुआ उससे पार्टी का मतदाता हताश और निराश है. उन्होंने खत में आगे लिखा कि पार्टी जिसे चाहे चुनाव के समय उसे टिकट दे, लेकिन जीतेगा वही जिसकी वहां हैसियत होगी और पार्टी तभी चुनाव जीतेगी जब अखिलेश यादव पार्टी का चेहरा होंगे. 
 
 मुलायम सिंह ने आज एक बार फिर से अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि अखिलेश ये ना समझें कि प्रदेश में पार्टी को दोबारा बहुमत मिलने की स्थिति में वो ही मुख्यमंत्री बनेंगे. उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायक और संसदीय बोर्ड उस बात का फैसला करेगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा. मुलायम ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि चुनाव में जीत के बाद पार्टी के विधायक तय करेंगे कि कौन सीएम बनेगा. इस बीच परिवार में चल रहे विवादों की खबरों पर पार्टी और परिवार के मुखिया मुलायम सिंह ने इन खबरों को सिरे से नकार दिया. उन्होंने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि मेरे परिवार में ना कोई विवाद था और ना है. 
 
शिवपाल ने कहा था कि कुछ लोगों को सब कुछ विरासत में और भाग्य से मिल जाता है और कुछ लोगों को मेहनत करते-करते जिंदगी बीत जाती है लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिलता लेकिन तब भी समाज की सेवा करते रहते हैं. बता दें कि शिवपाल यादव ‘बाबरी मस्जिद, एक प्रेम कथा’ फिल्म के विमोचन के लिए इटावा पहुंचे थे. उनके भाषण में समाजवादी परिवार में मचे घमासान का दर्द छलक पड़ा.