नई दिल्ली.  सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूतों की मांग के बीच संसद की रक्षा मामलों की समिति ने उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत से मुलाकात की है. इस मीटिंग में रावत ने संसदीय समिति को इस सीमा पार घुसकर कमांडों कार्रवाई के बारे में जानकारी दी.
 
हालांकि इस मुलाकात के दौरान समिति में शामिल किसी भी सांसद को सवाल-जवाब करने की मनाही थी. समिति के अध्यक्ष में बीजेपी सांसद भुवन चंद्र खंडूरी ने मीडिया को बताया कि सेना की ओर से इस कार्रवाई के बारे में जानकारी दी गई लेकिन सेना की ओर इस अभियान से जुड़ी गोपनीय बातों को उजागर नहीं किया गया है.
 
सेना से मेजर जनरल की पोस्ट से रिटायर हुए खंडूरी ने कहा कि इस मीटिंग के एजेंडे किसी भी तरह के सवाल-जवाब के बजाए सिर्फ सेना की ओर से ब्रीफिंग होना था क्यों ये कार्रवाई बहुत ही गोपनीय थी और इससे जुड़ी जानकारियों को उजागर नहीं किया जा सकता.
 
उन्होंने कहा कि आज की ब्रीफिंग संसदीय समिति के रिकॉर्ड में दर्ज होगी जिसे जल्द ही सार्वजनिक कर दिया जाएगा. आपको बता दें कि पहले इस मीटिंग का ऐजेंडा रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि की ओर से सीमा पार किए गए सर्जिकल स्ट्राइक पर होनी वाली ब्रीफिंग से आधार पर तय किया गया था. लेकिन बाद में इस मीटिंग के एजेंडे में ‘सीमा पार’ शब्द को हटा दिया गया.
 
इसका समिति में शामिल कांग्रेस के नेता अंबिका सोनी और मधुसूदन की मिस्त्री ने विरोध किया. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गोपनीयता की आड़ में इसके बारे में पूरी जानकारी न देना, दर्शाता है कि सरकार को सांसदों पर विश्वास नहीं है.
 
सर्जिकल स्ट्राइक पर हर तरह से पीएम मोदी का समर्थन करने वाली कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इससे जुड़े सबूतों को सार्वजनिक करना चाहिए ताकि पाकिस्तान के झूठ को उजागर किया जा सके.

हालांकि विपक्षी दल का यह भी का कहना है कि उनकी सरकार के समय भी तीन बार सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी लेकिन उस समय इसको गोपनीय रखा गया था क्योंकि सरकार पाकिस्तान को उकसाना नहीं चाहती थी. 
 

गौरतलब है कि सर्जिकल स्ट्राइक पर अब तक काफी बयानबाजी हो चुकी है. विपक्षी दलों को लगता है कि बीजेपी इसको विधानसभा चुनावों में भुनाने की कोशिश कर रही है.