भिंड. देश भर में स्वास्थ्य महकमें की उदासीनता के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा है कि सुधरने का नाम ही नही लेता. ताजा मामला मध्यप्रदेश के भिंड में देखने को मिला जहा एक सात साल के मासूम की मौत के बाद उसके परिजन एम्बुलेंस की आस में घण्टों तक अस्पताल में अपने बच्चे के शव को गोद में लेकर बैठे रहे.
 
डॉक्टर बने रहे मूक दर्शक
उनकी गुहार का असर न तो एम्बुलेंस चालकों पर हुआ और न मूक दर्शक बने अस्पताल में तैनात पुलिस कर्मियों पर और न ही डॉक्टरों पर हुआ. छह साल के मासूम अनुज के शव को लेकर भिंड जिला अस्पताल में बैठे उसके परिजन एम्बुलेंस की आस में घण्टों भटकते रहे. दरअसल रौन क्षेत्र का रहने वाला अनुज बुखार से पीड़ित था. उसकी हालात बिगड़ने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर आए.
 
ईलाज के दौरान हुई मौत
जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे को एडमिट किया और परिजनों से बोला की अनुज कोमा में है. परिजन उसकी सलामती की दुआ करते हुए डॉक्टरों से उसे बचाने की गुहार लगाने लगे, लेकिन आज सुबह उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई.
 
‘डॉक्टरों की लापरवाही से हुई बच्चे की मौत’
परिजनों का आरोप है कि अनुज की मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई है. हालांकि बच्चे की मौत के बाद मायूस परिजनों ने कोई हंगामा तो नही किया बल्कि डॉक्टरों से महज एम्बुलेंस की व्यवस्था करने की गुहार लगाई लेकिन शायद इंसानियत भूल चुके डॉक्टरों ने इसे अनसुना कर दिया. परिजन बच्चे के शव को लेकर एम्बुलेंस के लिए भटकते रहे, उन्होंने अस्पताल में तैनात पुलिस कर्मियों से भी एम्बुलेंस की व्यवस्था करने को कहा लेकिन वो भी महज मूक दर्शक बने तमाशा देखते रहे.
 
बाइक से ले गए बच्चे का शव
कई घण्टे बाद आखिरकार स्वास्थ महकमे से हार मानकर परिजनों अपनी मोटर साईकिल पर बच्चे के शव को रखकर अपने गांव ले गए. लेकिन किसी को दया नही आई लोग तमासा देखते रहे. बड़ा सवाल ये है की देश भर से स्वस्थ विभाग की उदासीनता की ऐसी तस्वीरें आए दिन सामने आ रही हैं और ऐसे मामलों में मध्यप्रदेश सबसे अब्बल दिखाई दे रहा है आलोचनाएं भी खूब हो रही हैं लेकिन देश में दुसरे भगवन के रूप में मने जाने वाले डॉक्टरों पर इसका कोई खास प्रभाव होता नही दिख रहा है.