नई दिल्ली. पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर 15 हजार मीट्रिक टन कूड़ा बिखरा है. इसकी वजह है सफाई कर्मचारियों का हड़ताल पर जाना. दरअसल वेतन न मिलने से एमसीडी के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं जिसके चलते पूर्वी दिल्ली में सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. हालात आने वाले दिनों में और भी बिगड़ सकते हैं. सकते में आई एमसीडी ने केजरीवाल सरकार को चेतावनी दी है की अगर कल यानि मंगलवार तक पैसा नहीं दिया तो कोर्ट का सहारा लेंगे.

नहीं मिली है सैलेरी

विनोद नगर, मंडावली, मौजपुर, सीलमपुर, बाबरपुर, जाफराबाद, वेलकम, नूर-ए-इलाही मेन रोड, गामड़ी, भुवनपुरा, कृष्णा नगर, राधेपुरी और पटपड़गंज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हाल ये है कि नाक पर रुमाल रखे बगैर सड़क पर चल नहीं सकते. गाड़ियों को सड़क से गुजरने का रास्ता तक नहीं. ऐसे में बीमारी फैलाने वाली गंदगी हादसों की वजह भी बन जाए, तो हैरानी नहीं. लेकिन देश की राजधानी जिसे देश का नाक कहा जाता है कि ये हालत किसने की? कौन है दिल्ली की इस हालत के लिए जिम्मेदार? किसकी वजह से पूर्वी दिल्ली के लोग हैं नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर?

असल में पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 28 हजार कर्मचारी हैं इनमें से 14765 कर्मचारी सफाई व्यवस्था में लगे हैं. एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ सफाई कर्मचारियों को हर महीने 42 करोड़ रुपये वेतन में दिए जाते हैं. ये कर्मचारी पूर्वी दिल्ली की कॉलोनियों से हर रोज 2 हजार से 22 सौ मीट्रिक टन कूड़ा निकालकर दूर फेकते हैं. लेकिन सैलरी न मिलने से नाराज कर्मचारी हड़ताल पर चले गए. कर्मचारी कॉलोनियों और गलियों के अलावा कूड़ा घरों से भी कूड़ा नहीं उठा रहे हैं.

कूड़ेदान बन गयी है पूर्वी दिल्ली

कई ढलावों पर दर्जनों ट्रक कूड़ा जमा हो गया है. एमसीडी मौजूदा हालात के लिये दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है. एमसीडी के मुताबिक दिल्ली सरकार उसे उसके हिससे का 300 करोड़ रूपये नहीं दे रही है जिसकी वजह से कर्मचारियों को वेतन दे पाना मुश्किल हो गया है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी यानी अरविंद केजरीवाल का राज है. कुछ महीने पहले भी निगम और दिल्ली सरकार की लड़ाई में दिल्ली कूड़ाघर में बदली थी. लेकिन लगता है तब से निगम और दिल्ली सरकार ने कोई सबक नहीं लिया. आखिर दिल्ली की इस बदसूरती की जिम्मेदारी तय तो होनी ही चाहिए.

IANS से भी इनपुट