नई दिल्ली. पूरी दुनिया में बेटियों के बचाने और पढ़ाने के ​लिए लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद बच्चियों के लेकर ​​स्थितियां अब भी रौंगटे खड़े कर देने वाली हैं. आज भी दुनिया में हर सात सेकेंड में एक नाबालिग लड़की की शादी कर दी जाती है. 
 
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सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर वैश्विक संस्था ‘सेव द चिल्ड्रन’ ने अपनी रिपोर्ट में लड़कियों के बाल विवाह से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में लड़कियों की संख्या 1.1 अरब है और हर सात सेकेंड में 15 साल से कम उम्र की एक लड़की की शादी कर दी जाती है. इनमें से ज्यादातार तो अपनी उम्र से दोगुने आदमी से ब्याह दी जाती हैं. 
 
भारत में हालत बुरी
आंकड़ों से यह भी पता चलता है साल 2050 तक हर साल नाबालिग लड़कियों की शादी का आंकड़ा 1.2 अरब तक पहुंच सकता है. बाल विवाह के मामले में भारत का सबसे बुरा हाल है. सबसे ज्यादा बाल विवाह यहीं होते हैं. देश की 47 फीसदी महिला आबादी में से करीब 2.46 करोड़ लड़कियों की शादी कम उम्र में हुई है. 
 
लड़कियों को बेहतर अवसर देने के मामले में 144 देशों की सूची में भारत को 90वां स्थान मिला है. यहां तक कि पाकिस्तान, भूटान और नेपाल तक भारत से आगे हैं. पाकिस्तान को 88वां, नेपाल को 85वां और भूटान को 80वां स्थान मिला है. पहले स्थान पर स्वीडन है.  
 
क्या हैं कारण
बाल विवाह के लिए गरीबी और सामाजिक असमानता जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया गया है. ये भी बताया गया कि कुछ देशों के लोग बरसों से चली आ रही परंपरा को नहीं बदलना चाहते. 
 
माता-पिता गृह युद्ध और हिंसा के माहौल में लड़की की शादी उन्हें सुरक्षित करने के लिए करते हैं. वहीं, जिन लड़किेयों की कम उम्र में शादी होती है उन्हें घरेलू हिंसा, शारीरिक शोषण, अवसाद और कमजोरी और एड्स जैसी ​बीमारियां को झेलना पड़ता है. यहां तक कि उन बच्चियों का बचप भी पूरी तरह खत्म हो जाता है.