लखनऊ.  ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला मैदान में जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाषण की शुरुआत ‘जय श्री राम’ से करके एक बड़ा संदेश दे दिया है.

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गौरतलब है कि ये नारा कभी मंदिर  आंदोलन का सबसे मुख्य नारा था और करीब 25 सालों बाद बीजेपी के किसी बड़े नेता ने सार्वजनिक मंच से इस नारे को दोहराया है.

अभी तक इस नारे को बोलते ही विपक्षी इसको सांप्रदायिक करार दे देते थे. लेकिन आज प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रधानमंत्री ने इस नारे को बोला तो वहां मौजूद वहां लोगों के मन में एक बार फिर अयोध्या के राम मंदिर  आंदोलन की यादें ताजा हो गई हैं.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं इस लिहाज से प्रधानमंत्री की रैली काफी महत्वपूर्ण है. ऐसा पहली बार है जब कोई प्रधानमंत्री दिल्ली से बाहर किसी रामलीला में हिस्सा लिया हो.

पीएम मोदी के इस कदम को विपक्षी राजनीतिक स्टंट करार दे रहें. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने दो दिन पहले ही बीजेपी पर सांप्रदायिकता की राजनीति का आरोप लगाया है और कहा कि विधानसभा चुनाव होने हैं तो अब पीएम दिवाली भी यहीं मनाएंगे.

वहीं यूपी के सीएम अखिलेश यादव भी निशाना साधने से नहीं चूके. उन्होंने कहा कि राज्य में चुनाव होने हैं तो पीएम लखनऊ में दशहरा मनाने आ रहे हैं. बिहार में चुनाव होता तो वहां चले जाते.

फिलहाल देखने वाली बात यह होगी कि प्रधानमंत्री मोदी का भाषण के शुरुआत में ‘जय श्री राम’ बोलने पर विपक्षी दलों का क्या प्रतिक्रिया होती है.